जिले के छोटे से लेकर बड़े अस्पताल मौसमी बीमारी से पीड़ित मासूमों से पटे पड़े हैं। बारिश न होने और गर्मी के साथ-साथ उमस के चलते बच्चे बीमार हो जा रहे हैं।
एक से पांच वर्ष तक के बच्चे प्रतिरोधक क्षमता कम होने से वॉयरल फीवर, सर्दी, जुकाम, खांसी, मलेरिया आदि की चपेट में आ रहे हैं। परिवार के लोग पहले घरेलू दवाएं करते हैं। आराम न मिलने पर अस्पताल की तरफ भागते हैं। इसके चलते अस्पतालों में भी ऐसी समस्या बढ़ गई है। भीषण गर्मी और उमस के समय में बिजली कटौती के चलते घरों में जरूरी हवा, पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही होने पर बच्चे मौसमी बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी आदि की चपेट में आ रहे हैं। जिले के पीएचसी, सीएचसी, निजी अस्पताल में मरीजों की कमी नहीं है। लेकिन, जिला अस्पताल में बड़े पैमाने पर मौसमी बीमारी से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। पिछले तीन दिनों से प्रतिदिन चार सौ से अधिक मरीज बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। अस्पताल में सुबह आठ बजे ओपीडी खुलने के पहले ही मासूम बच्चों को लेकर अभिभावक पहुंचकर कतार में लग जाते हैं। जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भोर में ही ज्ञानपुर के लिए निकलना पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि प्रतिरोधक क्षमता कम होने से मौसम बदलने की चपेट में आ जाते हैं।