सीतामढ़ी। लोकसभा के चुनाव के दौरान कई गांवों में ऐसे मामले आए, जहां मतदाता सूची में नाम न होने से वोटर परेशान रहे। इनमें कई ऐसे लोग थे, जो परदेस से केवल वोट देने के लिए घर आए थे, लेकिन मतदाता सूची से नाम गायब होने के कारण मन मसोस कर रह गए। इस पर लोगों ने बीएलओ पर मनमानी का आरोप लगाकर नाराजगी जताई। कोनिया क्षेत्र के कलिक मवैया गांव में क्षेत्र पंचायत सदस्य अंकित तिवारी, पूर्व ग्राम प्रधान हरिमोहन, कोटेदार राकेश पाल, सुनीता समेत करीब डेढ़ सौ मतदाताओं के नाम सूची से गायब थे। प्रधान प्रतिनिधि हृदय नारायण दूबे ने आरोप लगाया कि बीएलओ ने मनमानी तरीके से लोगों के नाम काट दिया है। जिले के अंतिम छोर गंगा की कटान प्रभावित छेछुआ गांव के दो बूथों 164 और 165 पर करीब एक हजार आठ सौ मतदाता हैं, लेकिन सूची से डेढ़ सौ से अधिक मतदाताओं के नाम गायब थे। गांव के हरिभगत सिंह अपने दो पुत्रों के साथ सूरत से मतदान करने आए थे, लेकिन तीनों के नाम मतदाता सूची में नहीं थे। इस पर लोगों ने नाराजगी जताई।
कलातुलसी गांव निवासी सुमित शुक्ला प्रयागराज में पढ़ाई करते हैं। शुक्रवार को वह लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने के लिए घर आए। शनिवार को मतदान करने गए तो सूची से नाम ही गायब रहा। इसी तरह ज्ञानपुर के कालिका नगर निवासी सत्तन सिंह उनकी बेटी कोमल सिंह और रीता सिंह मतदाता सूची में नाम न होने से वोट नहीं डाल पाईं। सत्तन हर बार के चुनाव में वोट देते आ रहे हैं। इस बार नाम कट जाने के कारण वे काफी निराश और नाराज भी हैं। इसी तरह बालीपुर में करीब 100 से अधिक, खमरिया में करीब दर्जन भर लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब रहे। लोगों का कहना है कि निर्वाचन आयोग वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने को लेकर इतना प्रयास करता है, लेकिन बीएलओ की लापरवाही सारे मेहनत पर पानी फेर देती है।