ज्ञानपुर। भदोही लोकसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी में सीधी लड़ाई के बीच बसपा की उपस्थिति ठीक नहीं रही। बसपा का कैडर वोट भी दूसरे दलों में खिसकता दिखा। आलम यह रहा कि 60 से 70 फीसदी बूथों पर बसपा के एजेंट भी नहीं दिखे। भाजपा और टीएमसी के एजेंट से पर्ची लेकर मतदाता वोट डालने के लिए बूथों पर गए। भदोही लोकसभा सीट पर बीते चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो बसपा काफी मजबूत स्थिति में रही है। 2008 में परिसीमन के बाद 2009 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में जहां बसपा के गोरखानाथ पांडेय ने जीत दर्ज की थी। वहीं 2014 और 2019 के चुनाव में बसपा दूसरे स्थान पर रही है। इस बार के चुनाव में बसपा शुरू से कमजोर दिखी। टिकट बंटवारे के दौरान बसपा को दो बार प्रत्याशी बदलने पड़े। सुबह सात बजे से मतदान शुरू हुआ तो ज्ञानपुर विधानसभा के बनकट, कलातुलसी, डीघ, छेछुआ, अभोली ब्लॉक के जगतपुर समेत 50 से अधिक बूथों पर बसपा के एजेंट नजर नहीं आए। सीतामढ़ी से सटे नारेपार बूथ पर एक हजार से अधिक दलित मतदाता हैं, लेकिन यहां भी पार्टी का बेस वोट खिसकता दिखा। सभी बूूथों पर टीएमसी और भाजपा के बूथ एजेंटों से मतदाता पर्ची लेकर वोट डालने पहुंचे।