शिक्षक बनने की जद्दोजहद में लगे जिले के द्वितीय बैच के 422 शिक्षामित्र नियुक्ति पत्र के लिए 12 घंटे इंतजार नहीं कर सके। शिक्षामित्रों की मांग को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सोमवार की देर रात सभी को नियुक्ति पत्र दे दिया। नियुक्ति पत्र पाने के बाद शिक्षामित्र गदगद कई शिक्षामित्रों के आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल बेहतर बनाने के लिए डेढ़ दशक पूर्व शिक्षामित्रों की तैनाती हुई थी। 3500 के अल्प मानदेय में नौकरी करने वाले शिक्षामित्रों ने एक साल के बाद से ही स्कूलों में शिक्षक पद पर समायोजित करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया।
करीब 12 साल की लंबी लड़ाई के बाद दो साल पूर्व सपा सरकार ने शिक्षामित्रों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बीटीसी प्रशिक्षण दिलाकर शिक्षक पद पर समायोजित करने की कवायद शुरू की। आठ माह पूर्व प्रथम बैच के 375 शिक्षामित्रों को जिले के अलग-अलग स्कूलों में समायोजित कर दिया गया, लेकिन द्वितीय बैच के शिक्षामित्रों का समायोजन स्कूलों में शिक्षकों के पद को लेकर फंस गया था।
करीब दो माह तक शिक्षामित्रों और विभाग के चली जद्दोजहद के बाद द्वितीय बैच के शिक्षामित्रों को समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। सोमवार को सीएमओ कार्यालय पर शिक्षामित्रों का मेडिकल कराया गया। मेडिकल के बाद बेसिक शिक्षा विभाग नियुक्ति पत्र बनाने में जुट गया।
विभागीय स्तर से शिक्षामित्रों को मंगलवार को नियुक्ति पत्र देने के लिए कहा गया लेकिन शिक्षामित्र सोमवार को ही नियुक्ति पत्र लेने के लिए अड़ गए। अंतत: विभाग ने 422 शिक्षामित्रों को सोमवार की रात करीब नौ बजे से दस बजे तक नियुक्ति पत्र दे दिया। आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष क्रांतिमान शुक्ला ने कहा कि शिक्षामित्रों की मेहनत और सरकार के प्रयास से शिक्षामित्रों का जीवन सुनहरा हो गया। शिक्षामित्रों ने सरकार और विभाग के प्रति आभार जताया।