भदोही। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई जाएगी। जिले में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खिलाड़ियों को बेहतर मंच देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। जिला स्टेडियम मूंसीलाटपुर में खिलाड़ियों को निखारने और तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए क्रिकेट, बैडमिंटन, खो-खो और बास्केटबाल के प्रशिक्षक ही नहीं हैं।
गुजरात के अहमदाबाद में 2030 में कॉमनवेल्थ गेम होना है। सरकार ने 2036 ओलंपिक कराने के लिए ओलंपिक समिति के समक्ष प्रस्ताव दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं को लेकर सरकार खेलों को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, लेकिन सच यह है कि जिला और ग्रामीण स्टेडियमों में खिलाड़ियों के लिए न तो सुविधाएं हैं और न ही मानक के अनुसार प्रशिक्षक। बिना द्रोण के कैसे अर्जुन बनेंगे, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
यहां कई वर्षों से प्रशिक्षक नहीं होने का दंश यहां के खिलाड़ी झेल रहे हैं। जिला स्टेडियम मूंसीलाटपुर में वैसे तो 10 खेलों में एक-एक प्रशिक्षक हैं, लेकिन महिला प्रशिक्षकों की कमी होने से महिला खिलाड़ियों को दिक्कत होती है। क्रिकेट, बैडमिंटन, खो-खो और बास्केटबाल के लिए प्रशिक्षक ही नहीं हैं। इससे यहां प्रशिक्षण लेने के लिए आने वाले खिलाड़ियों को दिक्कत होती है। वर्तमान में यहां 300 खिलाड़ी प्रतिदिन सुबह-शाम पहुंचकर पसीना बहाते हैं। ग्रामीण मिनी स्टेडियम चकमानधाता में प्रशिक्षक ही नहीं है। इससे यहां खिलाड़ी स्वयं ही प्रतिभा तराशते हैं। बैडमिंटन खिलाड़ी राजेश कुमार ने बताया कि वह प्रतिदिन स्टेडियम जाते हैं। प्रशिक्षक के न होने से वह खेल की बारीकियां नहीं सीख पाते। अंडर-15 के क्रिकेटर संजीव का कहना है कि प्रशिक्षक न होने से दिक्कत होती है।
जिला स्टेडियम में प्रशिक्षकों की स्थिति
स्टेडियम के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां बॉक्सिंग में धर्मेंद्र कुमार, हॉकी में मुनव्वर हुसैन, फुटबाल में बिंदु सिंह, एथलेटिक्स में विनय, हैंडबाल में मनोज, कबड्डी में श्वेता पटेल, वाॅलीबाॅल में प्रेम कुमार, कुश्ती में मारूति नंदन, भारोत्तोलन में दिलीप कुमार और एथलेटिक्स में ज्योति कुमार हैं। सभी खेलों में 300 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
यह है विभाग का नियम
नियमानुसार हर स्टेडियम में प्रत्येक खेल के लिए दो कोच का प्रावधान है। इनमें एक महिला और एक पुरुष कोच होना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि कई खेल ऐसे हैं, जिनके कोच ही नहीं हैं। 10 खेलों में एक-एक ही कोच हैं। क्रिकेट, बैडमिंटन समेत चार खेलों में कोच का पद रिक्त होने के कारण प्रशिक्षण लेने आने वाले खिलाड़ियों को उचित दिशा-निर्देश नहीं मिल पाते हैं।
पूर्व से अब स्टेडियम की स्थिति बेहतर हुई है। अब 10 खेलों के प्रशिक्षक हैं, जो नियमित प्रशिक्षण दे रहे हैं। चार खेलों के प्रशिक्षक के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रशिक्षक मिल जाएंगे। - धर्मेंद्र कुमार, उप क्रीड़ा अधिकारी