उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल (पू.मा.) शिक्षक संघ के आह्वान पर जनपद इकाई के जिलाध्यक्ष डॉ.रामविलास भारती के नेतृत्व में शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
डॉ. रामबिलास भारती ने केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एक सितंबर 2025 को सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता संबंधी दिए गए निर्णय पर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की।
भारती ने कहा कि न्यायालयों की ओर से से पारित सभी आदेश/निर्देश का पालन किया जाता है। लेकिन टीईटी संबंधी यह निर्णय शिक्षक हित में न होने के कारण बहुत से शिक्षकों की नौकरी संकट में आ गई है।
ऐसी स्थिति में उच्चतम न्यायालय की ओर से पुनर्विचार आरटीई एनसीटीई अधिनियम लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट प्रदान किया जाना आवश्यक है। जिससे शिक्षक अपनी नौकरी बचाने में ऊर्जा खर्च करने के बजाय शैक्षिक गुणवत्ता पर लगा सके।
जब 23 अगस्त 2010 के पूर्व नियुक्त बेसिक शिक्षक शिक्षक पात्रता परीक्षा में निर्धारित शर्तों के अनुसार आवेदन ही नहीं कर सकेगें तो फिर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन किस प्रकार संभव हो सकेगा।
ऐसी स्थिति में देश के लगभग 40 लाख तथा उत्तर प्रदेश के करीब 04 लाख बेसिक शिक्षकों की नौकरी चली जाएगी। शिक्षक हित में सरकार अध्यादेश लाकर शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) से मुक्त करे। संवाद