संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। जिले के प्रमुख गंगा घाटों पर कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधाओं के इंतजाम नाकाफी हैं। 30 जुलाई से शुरू हो रहे सावन माह और कांवड़ यात्रा के दौरान घाटों पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए अब तक की तैयारियां पर्याप्त नहीं हैं।
सीतामढ़ी को छोड़ दें तो सेमराध, रामपुर, बिहरोजपुर और डेरवां जैसे गंगा घाटों पर न तो सुरक्षा के विशेष इंतजाम हैं और न ही कांवड़ियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। सावन में कांवड़ियों के अलावा बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु भी स्नान करने पहुंचती हैं। ऐसे में घाटों पर व्यवस्थाओं के अभाव में आस्था जोखिम में है।
आगामी सप्ताह से शुरू होने वाले सावन माह को ध्यान में रखते हुए हमारी टीम ने बृहस्पतिवार को जिले के पांच प्रमुख घाटों सीतामढ़ी, सेमराध, रामपुर, बिहरोजपुर और डेरवां की पड़ताल की। टीम करीब 30 मिनट तक प्रत्येक घाट पर रुकी और कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जायजा लिया। पड़ताल में सीतामढ़ी घाट को छोड़कर अन्य घाटों पर व्यवस्थाएं नाकाफी मिलीं। सीतामढ़ी में व्यवस्थाएं बेहतर होने का कारण यहां चल रहा लवकुश मेला बताया गया।
जिले के इन पांच प्रमुख घाटों से प्रत्येक रविवार भोर में कांवड़ियों की टोलियां जल भरकर नजदीकी शिवालयों में जलाभिषेक के लिए जाती हैं। सेमराध घाट पर एक, रामपुर में तीन और सीतामढ़ी में पांच कपड़ा बदलने के लिए चेंजिंग रूम हैं। सीतामढ़ी को छोड़कर अन्य घाटों पर पेयजल और शौचालय की व्यवस्था नहीं है। साथ ही गोताखोर और प्रशासन की टीम भी नजर नहीं आई। सावन माह में इन घाटों पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और कांवड़िये स्नान करने आते हैं। सीतामढ़ी से श्रद्धालु जल भरकर सेमराधनाथ में जलाभिषेक करने जाते हैं। इसी प्रकार सेमराध से सेमराधनाथ एवं गोपीगंज के बड़े शिव मंदिर तथा बिहरोजपुर और डेरवां से तिलेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु जाते हैं।
बिहरोजपुर घाट का कच्चा मार्ग जर्जर
सावन माह में स्नानार्थियों की संख्या अन्य दिनों की अपेक्षा 50 फीसदी तक बढ़ जाती है। घाट तक पहुंचने वाला मार्ग कच्चा है और बीच की मिट्टी कटने लगी है। आसपास झाड़ियां हैं। बारिश के मौसम में रास्ते पर जहरीले जीव-जंतुओं के होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पक्का रास्ता और प्रकाश की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
अंधेरे में जल भरेंगे कांवड़िये
सावन में इन घाटों पर प्रशासन के दावों के विपरीत घाटों पर सुरक्षा और सुविधाओं के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। स्थिति यह है कि कांवड़ियों को अंधेरे और गंदगी के बीच जल भरना पड़ता है। सुबह चार बजे से ही कांवड़ियों का आना शुरू हो जाता है, लेकिन सीतामढ़ी के अलावा किसी घाट पर बैरिकेडिंग नहीं है। गोताखोर भी तैनात नहीं मिले। बिहरोजपुर, डेरवां और सेमराध घाट पर शाम होते ही अंधेरा छा जाता है, क्योंकि वहां प्रकाश की व्यवस्था नहीं है।
शिव मंदिर के रास्ते पर जलभराव से कीचड़
दुर्गागंज। मतेथू गांव में प्राचीन शिव मंदिर है। मंदिर का मुख्य मार्ग सरोज बस्ती से होकर गुजरता है। रास्ते पर जलजमाव और कीचड़ है। सावन माह में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु इसी मार्ग से मंदिर पहुंचते हैं। अभिषेक पांडेय, सर्वेश शुक्ला, वैभव पाठक और सचिन मिश्रा सहित अन्य लोगों ने डीएम से सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है।
सावन माह में घाटों पर अनुमानित भीड़
सीतामढ़ी : करीब 12 से 15 हजार
सेमराध : करीब 10 से 12 हजार
रामपुर : करीब 7 से 8 हजार
डेरवां : करीब 2 से 4 हजार
बिहरोजपुर : करीब 4 से 5 हजार