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Bhadohi News: तीन जिलों का एक अस्पताल, साढ़े तीन साल में एक भी पशु को नहीं मिल सका उपचार

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पशु पाली क्लीनिक के पोस्टमार्टम हाउस पर लगा ताला। संवाद
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ज्ञानपुर। जिले में साढ़े तीन साल से संचालित मंडलीय पशु पॉली क्लीनिक में अब एक भी पशु का उपचार नहीं हुआ है और न ही किसी पशुपालक को योजना का लाभ न सुविधा मिली है। करीब 6.5 करोड़ से बना यह अस्पताल केवल अधिकारियों का आवास व कार्यालय बनकर रह गया है। यहां पहुंचने पर न तो चिकित्सक मिलेंगे और न ही कोई पशु। इस अस्पताल के ऊपर भदोही के अलावा मिर्जापुर और सोनभद्र के मवेशियों के उपचार और पशुपालकों को योजनाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी है।
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जिले में तीन स्थायी और 29 अस्थायी गोशाला है। जहां करीब 6500 गोवंश संरक्षित हैं। एक गोवंश के भरण पोषण पर 50 रुपये मिलता है। इसके अलावा 11 पशु अस्पताल और नौ पशु सेवा केंद्र संचालित हैं। जिले के 1.75 लाख पशु पालक और 4.50 लाख मवेशियों के सुविधाओं व उपचार की जिम्मेदारी इनके ऊपर है। हमारी टीम ने बृहस्पतिवार को पशु पॉली क्लीनिक की पड़ताल की। भवन के मुख्य द्वार को छोड़कर परिसर में गंदगी की अंबार रही। पोस्टमार्टम हाउस में ताला लगा रहा। आसपास बड़ी-बड़ी घास उगी रही, भवन के मेनगेट पर ताला बंद रहा। सीतामढ़ी में लवकुश मेला होने के कारण स्थानीय अवकाश रहा, लेकिन अस्पताल खुला रहा। परिसर के अंदर ही ज्ञानपुर सदर अस्पताल पर तैनात एक पशुकर्मी ने बताया कि भवन के अंदर पशुपालन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी बैठते हैं। अंदर ही दवा का गोदाम भी बना है। डॉक्टर फार्मासिस्ट मुख्यालय पर नहीं मिले।
सीएम ने किया था लोकार्पण
मंडल के तीनों जिला मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही के पशुपालकों की सुविधा के लिए छह करोड़ 49 लाख से अक्तूबर 2021 में भवन तैयार हुआ। उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2022 में इसका लोकार्पण किया। जिलाधिकारी के निर्देश पर 2024 में पशुपालन विभाग का दफ्तर पॉली क्लीनिक के भवन में शिफ्ट हो गया और अस्पताल का संचालन शुरू हो गया, लेकिन यहां मवेशियों का उपचार तो दूर सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो पाती।
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मंडल में पशुओं की संख्या:
जिला - पशुपालक - पशु
भदोही - 1.75 लाख - 4.50 लाख
सोनभद्र - 1.50 लाख - 8.40 लाख
करीब साल भर पहले ज्ञानपुर नगर के मुखर्जी पार्क के पास एक गोवंश को दुर्घटना हो गया था। तीन-चार दिनों तक उपचार किया गया, आराम नहीं मिला। पशुपालन विभाग की उसे वाराणसी रेफर कर दी। वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर बाबूसराय के पास एक ट्रक ने गोवंश को टक्कर मार दी थी। गोवंश खड़ी नहीं हो पा रही थी। समाजसेवी के हस्तक्षेप के बाद गोवंश को वाराणसी के पशु अस्पताल भेजा गया।
पशुपालक की प्रतिक्रिया
सरकार का यह महत्वपूर्ण परियोजना लापरवाही व उदासीनता की भेंट चढ़ गई। स्टाफ की तैनाती न होने से पशुओं का इलाज नहीं होता है। कोई पशु गंभीर रूप से बीमार हो जाए, उपचार करने की व्यवस्था नहीं है। - अवधेश विश्वकर्मा, दुर्गागंज।
यदि पशु पॉली क्लीनिक का संचालन शुरू है, यदि सुविधाओं का विस्तार कर दिया जाए। तो पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं को लेकर इधर-उधर लेकर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सही समय पर समुचित उपचार होगा। - संतलाल यादव, बनपुरवा।
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