रमईपट्टी-कनौराघाट मार्ग पर अर्जुनपुर नहर के किनारे फेला कूड़ा।- संवाद।
गांवों को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए करोड़ों रुपये से बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) कागजों में ही चल रहे हैं।
हकीकत में किसी भी केंद्र पर ठीक से कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कहीं वर्षों बाद भी ढांचा अधूरा है। कई जगह आरआरसी के संयंत्र बेकार पड़े हैं। गांवों और प्रमुख सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिले की 809 ग्राम पंचायतों में 692 आरआरसी बनाए गए हैं।
जिला पंचायत राज विभाग की ओर से इनमें 634 केंद्रों के संचालित होने का दावा किया जा रहा है। गांवों में घर-घर से कूड़ा उठाने और उसे आरआरसी तक पहुंचाकर निस्तारित करने की व्यवस्था प्रभावी नहीं है। ग्रामीण खुले में कूड़ा फेंकने को विवश है। जिला पंचायतराज अधिकारी के मुताबिक जिले के गांवों से रोज 809 क्विंटल कूड़ा निकलता है।
सिर्फ बीस क्विंटल का निस्तारण हो पा रहा है। सीखड़ ब्लॉक के मगरहा समेत कई ग्राम पंचायतों में आरआरसी कागजों में संचालित हैं। गांव में नियमित कूड़ा निस्तारण नहीं हो रहा है। इससे राहगीरों का सड़क पर चलना दुश्वार हो गया है।