सीतामढ़ी। पश्चिमी यूपी में हो रही मूसलाधार बारिश का असर गंगा के जलस्तर में दिखने लगा है। करीब 15 दिनों तक स्थिर रहने वाली गंगा एक बार फिर उफान पर है। शुक्रवार को अप्रत्याशित रूप से 10 से 12 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। 24 घंटे में तीन मीटर से अधिक पानी बढ़कर 75.240 मीटर तक पहुंच गया।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने अफसरों को अलर्ट कर दिया है। अगस्त में पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और नदियों का पानी छोड़ने से दो बार गंगा के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि 75 से 77 मीटर मीटर तक पानी पहुंचने के बाद कम होने लगा तो लोगों ने राहत की सांस ली। करीब एक पखवारे तक पानी 72 मीटर के करीब पहुंचकर स्थिर हो गया। पश्चिमी यूपी और पहाड़ी क्षेत्रों में दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण जलस्तर में एक बार फिर वृद्धि शुरू हो गई।
बृहस्पतिवार की रात में जलस्तर में मामूली वृद्धि शुरू हुई और शुक्रवार को तड़के सुबह से देखते ही देखते गंगा का पानी तेजी से घाटों की ओर बढ़ने लगा। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी मीटर गेज पर शुक्रवार शाम चार बजे तक जलस्तर 75.240 मीटर तक पहुंच गया है।
सीतामढ़ी में गंगा का पानी एक बार फिर से पक्की सीढ़ी तक पहुंच गया है। जलस्तर अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो शनिवार से ही कोनिया के छेछुआ, भुर्रा सहित अन्य गंगा कटान प्रभावित गांव के किसानों की जमीन गंगा की कटान की चपेट में आने लगेगी। तीन ओर गंगा की धाराओं से घिरा जनपद का कोनिया क्षेत्र गंगा बाढ़ की दृष्टि से काफी संवेदनशील है।
जिले में गंगा की चेतावनी बिंदु 80.2 मीटर और खतरे का निशान 81.2 मीटर है। अधिशासी अभियंता सिंचाई सुधीर कुमार पाल ने कहा कि 24 घंटे में पानी तेजी से बढ़ा है, लेकिन अभी चेतावनी बिंदू से काफी नीचे है। उच्चाधिकारियों ने सभी बाढ़ चौकियों और नामित अधिकारियों को अलर्ट कर दिया है। बाढ़ के दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी रखी जा रही है।