ज्ञानपुर। गंगा का जलस्तर शनिवार को खतरे के निशान को छूने को बेताब हो गया। इस वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका जलस्तर खतरे के निशान से महज दो मीटर नीचे दर्ज किया गया। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित कोनिया क्षेत्र के भुर्रा और छेछुआ गांवों में जहां कटान शुरू हो गई, वहीं सीतामढ़ी से लेकर रामपुर तक गंगा के तमाम घाटों पर बाढ़ का पानी हिलोरे मारने लगा। रामपुर में शवदाह गृह पानी में डूब गया। गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी जारी है।
सीतामढ़ी संवाददाता के मुताबिक शनिवार को जलस्तर बढ़ने की गति में थोड़ी कमी आई। एक दिन पहले तक गंगा का जलस्तर जहां पांच सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था, वहीं शनिवार शाम को यह गति एक सेमी प्रति घंटे हो गई। बावजूद इसके गंगा तटीय लोगों की नींद उड़ने लगी है। इसी के साथ जलस्तर इस सीजन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। शनिवार को गंगा का जल स्तर 78 मीटर पार कर गया। तीन ओर गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र के गंगा तटीय गांव छेछुआ और भुर्रा गांव में गंगा कटान शुरू हो गई है। तेजी से हिलोरें लेती गंगा की कुपित लहरें किसानों की खेती की जमीनों को रेतने लगी हैं। इसी तरह सीतामढ़ी के उड़िया बाबा आश्रम का निर्माणाधीन संस्कृत विद्यालय पानी बाढ़ के पानी से घिर गया। सीतामढ़ी के पक्के घाट पर पानी तेजी से चढ़ने लगा है। हालांकि कोनिया के अन्य गंगा तटीय गांवों में किसी भी प्रकार की समस्या सामने नहीं आई है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी गेज कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक शनिवार शाम पांच बजे जल स्तर 78.130 मीटर दर्ज किया गया, जो दो वर्षों का उच्चतम जल स्तर है। जल स्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। खतरे का निशान 80 मीटर माना जाता है।
गोपीगंज संवाददाता के अनुसार रामपुर घाट पर गंगा का पाट बाढ़ के कारण बेहद चौड़ा हो गया है। शवदाह गृह जहां बाढ़ के पानी में डूब गया, वहीं घाट की सीढ़ियां भी गंगा में समा गईं हैं। बाढ़ के मद्देनजर शनिवार को स्टीमर गंगा में चलने बंद हो गए। नाविकों ने अपनी नावें किनारे लगा दीं।