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गणपति बप्पा मोरया... के जयघोष के बीच विराजे विघ्नहर्ता

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ज्ञानपुर। विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य गणपति की उपासना का पर्व गणेशोत्सव शनिवार को आध्यात्मिक उल्लास के बीच आरंभ हो गया। कोविड-19 के साए में शुरू हुए गणेश पूजन के निमित्त सार्वजनिक महत्व के स्थलों और मंदिरों पर भीड़भाड़ कम दिखी, लेकिन घर-घर गणपति पूजन का उल्लास सिर चढ़कर बोलता रहा। लोगों ने प्रथमेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू कर दी।
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भादों महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन गणेश उत्सव का आरंभ होता है। मुख्य रूप से महाराष्ट्र और पश्चिमी भारत के इस पर्व का चलन अब पूर्वांचल में भी जोरों पर हो गया है। इस बार कोरोना संक्रमण काल के असर के चलते गणेशोत्सव की धूम देखने को नहीं मिली, लेकिन लोगों पर त्योहार की खुमारी चढ़ी रही। बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने घर पर गणपति की मूर्ति स्थापित की और लोक कल्याण के निमित्त उपासना शुरू कर दी। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई गणपति की आराधना कभी खाली नहीं जाती। विघ्नहर्ता सभी कष्टों को हर लेते हैं। गणेश चतुर्थी के मद्देनजर हरिहरनाथ मंदिर परिसर में स्थित गणेश मंदिर पर दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया था। हालांकि इस दौरान कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ रहा था। गणेश चतुर्थी का असर बाजार में भी देखा गया। गणेश प्रतिमाओं के अलावा पूजा के सामान और फलों की खरीदारी लोगों ने एक दिन पूर्व ही कर ली थी। कोरोना के मद्देनजर दो दिन की साप्ताहिक बंदी के चलते शनिवार को बाजार पूरी तरह बंद रहे। इसके चलते श्रद्धालुओं ने एक दिन पूर्व ही खरीदारी कर ली थी।
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