ज्ञानपुर। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पारदर्शी ढंग से धरातल पर लाने की मुहिम जिले में बेपटरी होती दिख रही है। ग्राम पंचायत अधिकारियों (सचिव) के स्थानांतरण और रोक के खेल में अधिकतर ग्राम पंचायतों का विकास ढीला पड़ गया है। माननीयों के कृपापात्र सचिवों के पास जहां 15 से 16 गांव हैं तो वहीं किसी के पास एक भी गांव देखने को नहीं है। अभोली, भदोही सहित अन्य ब्लॉकों में यह स्थिति बनी हुई है।
केंद्र और प्रदेश सरकार गांवों के विकास पर विशेष जोर दे रही है। राज्य और 14वें वित्त के धन से आवास, शौचालय, खड़ंजा, तालाब के सुंदरीकरण समेत अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं। ग्राम प्रधान के साथ ही ग्राम पंचायत अधिकारी विकास कार्यों की मुख्य धारा में रहते हैं। बजट आहरण से लेकर निगरानी की जिम्मेदारी सचिवों की रहती है। पिछले दिनों अभोली, सुरियावां, भदोही समेत अन्य ब्लॉकों में सचिवों को इधर-उधर किया गया। कुछ सचिव तो स्थानांतरण स्थल पर चले गए, लेकिन कई सुबह स्थानांतरित हुए तो शाम तक लौट आए। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे कई सचिव तो सत्तासीन नेताओं की कृपा से स्थानांतरण नीति को भी बेकार साबित कर रहे हैं। बानगी के तौर पर अभोली ब्लॉक के नागमलपुर गांव का मामला ही ले लिया जाए तो यहां सेक्रेटरी के खिलाफ कई बार ग्रामीणों ने आला अधिकारियों से शिकायत की। स्थानांतरण भी हो गया, लेकिन एक से दो दिन में उसी गांव में फिर तैनाती दे दी गई, जबकि उस क्षेत्र में आए सेक्रेटरी भी वहां से नहीं हट सके। ऐसे में कई ग्राम प्रधान भी असमंजश में हैं कि किस सचिव से चेक आदि कटवाएं। अभोली में कुल 57 ग्राम पंचायतों में करीब 40 से 45 गांव तीन सेक्रेटरियों के जिम्मे हैं। जो हर गांव में समय नहीं दे पाते, जबकि सात से आठ ऐसे सेक्रेटरी हैं जिनके पास मात्र एक या दो गांव ही हैं। सूत्रों की मानें तो सत्ता के करीबी सचिवों पर विभाग की विशेष मेहरबानी रहती है।
मुख्य विकास अधिकारी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि सचिवों का स्थानांतरण पंचायत राज विभाग की ओर से किया गया है। अगर गड़बड़ी हुई है तो उसे दिखवाएंगे।