ज्ञानपुर। गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया, सुख कर्ता-दुख हर्ता... आदि के जयघोष से बुधवार को कालीन नगरी गूंज उठी। मौका था विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य देवता गणपति महराज के पंडालों में विराजमान होने का।
शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक गणपति उत्सव की धूम रही। गाजे-बाजे के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाएं पंडालों में स्थापित की गईं। विघ्नहर्ता का सुंदरवन में जहां फलों से शृंगार हुआ। वहीं खमरिया के एक पंडाल में गणेश जी को महाभारत कथा लिखते हुए दर्शाया गया है।
गणेश चतुर्थी के मौके पर शाम सात बजे के बाद शुभ मूहुर्त में भगवान श्रीगणेश जी पंडाल में स्थापित किए गए। मंत्रोच्चारण के बीच मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई। पंडालों में लगी रंग-बिरंगी लाइटें और फूल देखकर आने वाले हर श्रद्धालुओं को आकर्षित हो उठे।
भदोही नगर में जिले की सबसे ऊंजी 19 फीट की प्रतिमा स्थापित है। वहीं खमरिया में 1992 गणपति बैठाए जा रहे हैं। जिले में 95 फीसदी प्रतिमा जिले से लाई गई है। खमरियां में एक प्रतिमा मुंबई से लाई गई है। पंडालों के पास मेला जैसा महौल है।
खमरिया के भुजवा का शिवाला, खमरियां बाजार के मुख्य चौराहा पर नगर की सबसे ऊंजी प्रतिमागई। खमरिया धोबियान मुहल्ला की मूर्ति मुंबई से लाई गई है।
इस मूर्ति की ऊंचाई लगभग सात फीट है। वहीं ज्ञानपुर, सुंदरवन, भदोही, गोपीगंज, जंगीगंज के बीसा गांव बप्पा की प्रतिमा स्थापित है।
नौ फीट की है प्रतिमा : खमरिया। 1992 से भुजवा का शिवाला में गणेश जी का प्रतिमा स्थापित होती आ रही है। यह बप्पा की प्रतिमा एकता का संदेश दे रही है। यहां अयोध्या के श्रीराम के थीम पर काले रंग से पंडाल बनाया गया है। नगर में भगवान गणेश जी की सबसे बड़ी मूर्ति यही स्थापित है।
महाराष्ट्र के कृष्णा निकम ने 2005 में शुरू किया गणेश पूजा : गोपीगंज। नगर में गणेश पूजनोत्सव की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। इससे पहले यहां गणेश पूजा की प्रथा नहीं थी।
महाराष्ट्र के सांगली निवासी कृष्णा निकम ने सदर मोहाल मां दुर्गा गली में नगर का पहला पंडाल स्थापित हुआ। नगर का पहला पूजा पंडाल है। सात फीट की प्रतिमा है।
सभी लोग सुबह शाम आरती में शामिल होते हैं। आयोजन में सूरज, बाबूराव, वैभव, सौरभ, सुबास विशेष भूमिका है।