भदोही। अमेरिका की ओर से टैरिफ वार शुरू होने के बाद ब्रिटेन ने भारतीय कालीन और हस्तशिल्प उत्पादों पर जो दरियादिली दिखाई है, वह कालीन उद्यमियों के लिए राहतभरी खबर है।
ब्रिटेन-भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से अब तक लग रहे 8 प्रतिशत आयात शुल्क को शून्य कर दिया गया है। कालीन निर्यातकों की मानें तो थोड़ा सा प्रयास करने पर अमेरिका से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन दौरे के दौरान प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ जो हस्ताक्षर किया है, वह दूरगामी है, ऐसा निर्यातकों का मानना है।
कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जो टैरिफ बढ़ाई है, उस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इस एफटीए से कालीन उद्यमी ब्रिटेन में कालीन बिक्री के लिए अवसर तलाश सकते हैं।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के मुताबिक भारत से ब्रिटेन को पिछले पांच वर्षों में कालीन निर्यात 28 प्रतिशत बढ़ कर 867.49 करोड़ हो गया है। इसलिए कहा जा रहा है कि इस एफटीए का लाभ कालीन उद्योग को मिलेगा।
सबसे खास बात यह है कि अमेरिकी टैरिफ पर कालीन उद्योग में मंदी के हालात बन रहे थे। मुक्त व्यापार समझौते ने लोगों को भविष्य में बड़े राहत की ओर इशारा किया है।