पर्यावरण को हरा-भरा बनाने को हर साल होने वाला पौधरोपण अभियान निगरानी न होने से लक्ष्य से भटक चुका है। पांच साल में करीब चार लाख से अधिक पौधे लगाए गए लेकिन वनक्षेत्र का दायरा 0.1 फीसदी से आगे नहीं बढ़ सका। नए पौधों का संरक्षण बेहतर न होने से या तो वह सूख जातेे हैं या मवेशी खा जाते हैं। ग्रीन यूपी- क्लीन यूपी अभियान में जुलाई 2016 में 88 हजार 500 पौधे लगाए गए लेकिन जमीनी हकीकत में ज्यादातर पौधे सूख गए हैं। विभाग का दावा है कि 70 फीसदी पौधे बच गए हैं जबकि 30 फीसदी पौधे भी नहीं दिख रहे हैं।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए शासन की ओर से हर साल पौधरोपण कराया जाता है। बारिश के सीजन में अभियान के तहत 70 से लेकर 90 हजार तक पौधे ग्रामसमाज, सरकारी भूमि, शिक्षण संस्थानों पर लगाए जाते हैं लेकिन ज्यादातर पौधे देखरेख के अभाव में सूख जाते हैं या मवेशियों के भेंट चढ़ जाते है। पांच साल में पौधरोपण के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो करीब चार लाख पौधे लगाए गए लेकिन देखरेख न होने से ज्यादातर सूख गए। 12 जुलाई 2016 को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम योजना ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी के तहत जिले में 90 हेक्टेयर में 88 हजार 500 पौधे एक दिन में लगाए गए थे। सुरियावां के महुआपुर, बहरैची, बावन बीघा तालाब, औराई के वन विभाग रेंज, तालाबों के किनारे, ज्ञानपुर के केएनपीजी के हास्टल में पौधों को लगाया गया था, लेकिन वर्तमान में उन स्थानों पर ज्यादातर पौधे सूख गए हैं। पर्यावरण संरक्षण का काम कर रही सीड संस्था की उपाध्यक्ष सरिता मिश्रा ने कहा कि पौधे लगाने मात्र से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। करीब तीन से चार साल तक उसकी सेवा करनी चाहिए।
प्रभागीय वनाधिकारी केके पांडेय ने कहा कि पूर्व के वर्षों में पौधों के संरक्षण को लेकर जागरूकता की कमी थी, लेकिन गत तीन साल में संरक्षण का दायरा बढ़ा है। अब लगने वाले पौधों को संरक्षित किया जा रहा है।