कछुआ सेंचुरी प्रोजेक्ट के तहत होगा काम
भदोही, प्रयागराज और मिर्जापुर जिलों में गंगा नदी के 30 किलोमीटर के तटीय क्षेत्र को कछुआ सेंचुरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। भदोही के कोनिया क्षेत्र के बारीपुर और उपवार इलाके भी शामिल हैं। यहां खनन और मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है। इसका उद्देश्य जलीय जैव विविधता की रक्षा करना है। कछुआ सेंचुरी प्रोजेक्ट के तहत ही गंगा की सीमाओं का पता लगाए जाने का काम शुरू किया गया है।
कटान रोकने के लिए रोपे जाएंगे कटानरोधी पौधे
वन विभाग इस बार मैंग्रोव, बांस, लिसोड़, अर्जुन, जामुन, इमली, पीपल, पाकड़ आदि पौधे गंगा किनारे रोपित करेगा। यह पौधे जलीय भूमि के किनारे लगाए जाते हैं। ताकि कटान रोकने में मदद मिले। बांस में कल्ले बहुत जल्द निकलते हैं। एक साल में ही बांस का जंजाल फैल जाता है।
जिले में गंगा का दयारा
जिले में गंगा लंबाई - 36 किमी
गंगा के तटवर्ती गांव - 47
कटान प्रभावित गांव - 12 गांव
कछुआ सेंचुरी का दायरा - 30 किमी
मैपिंग के बाद क्या होंगे फायदे
- वन्य जीवों की रक्षा
- कटान से मुक्ति
- अतिक्रमण से मुक्ति
- खनन पर रोक
- जलीव जैव विधिवता का संरक्षण
गंगा के सीमाओं की मैपिंग कराई जाएगी। इससे गंगा की सीमा की पहचान होगी। निजी संस्था को नामित किया गया है। इस कार्य से कटान रोकने के साथ-साथ गंगा की जमीनों पर अतिक्रमण की समस्या भी रोकी जा सकेगी। -
विवेक यादव, डीएफओ, भदोही।