जिला अस्पताल के पैथालाजी में ब्लड जांच के लिए मरीजों का सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी।संवाद
बलिया। मौसम में बदलाव के कारण जिले में सर्दी-जुकाम, गले में खराश, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल में विगत चार दिनों में 20 फीसदी से अधिक मरीज बढ़े हैं। ओपीडी में पहुंचने वाले करीब 60 फीसदी मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। प्रदेश के 57 जिलों में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। जिले में स्वाइन फ्लू की जांच सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे बीमारी की पुष्टि में दिक्कत आ रही है। जिला अस्पताल में दो दिनों में चार हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचे। फिजिशियन ओपीडी में प्रतिदिन पांच सौ के करीब मरीज देखे गए, जिनमें 250 से अधिक फ्लू के लक्षण वाले थे। बाल रोग ओपीडी में भी बड़ी संख्या में बच्चों में बुखार, खांसी और कमजोरी की शिकायतें मिली हैं। कुछ मरीजों की प्लेटलेट्स कम मिली हैं, जबकि अधिकांश की रिपोर्ट सामान्य होने पर भी कमजोरी है।
लक्षणों के आधार पर इलाज और जांच की तैयारी
सीएमओ डॉक्टर अभय नारायण राय ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग चिकित्साधिकारियों को लगातार अलर्ट कर रहा है। ओपीडी में आने वाले संभावित मरीजों की निगरानी की जा रही है। अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन और आइसोलेशन बेड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध मरीजों की जांच आरटीपीसीआर लैब में कराने की तैयारी चल रही है। किट उपलब्ध होने और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण मिलने के बाद जांच शुरू होगी। जिला अस्पताल के कोल्ड वार्ड और सीएचसी पर पांच बेड संभावित फ्लू मरीजों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।
फ्लू के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
इन्फ्लुएंजा में बुखार, ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर व मांसपेशियों में दर्द और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों में गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक होता है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ से बचें, खांसते या छींकते समय नाक-मुंह ढकें और हाथों को नियमित धोते रहें। सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
जिला अस्पताल की ओपीडी
26 अगस्त 1037
27 अगस्त 1503
29 अगस्त 1682
31 अगस्त 2000
01 सितंबर 1867