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बाढ़ : 12 अति और 200 गांव संवेदनशील चिह्नित, 22 चौकियां होंगी स्थापित

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डीघ के छेछुआ में गंगा का जलस्तर बढ़ने से हो रहा कटान। फाइल फोटो - फोटो : Archive
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जिले में मानसून से पहले प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैयारी शुरू कर दी है। बाढ़ के मद्देनजर 12 अति संवेदनशील और 200 संवेदनशील गांवों को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है। गंगा, वरुणा और मोरवा नदी के किनारे 22 बाढ़ चौकियां स्थापित की जाएंगी। 15 जून के बाद सभी चौकियां सक्रिय कर दी जाएंगी। - बाढ़ को लेकर कोनिया के 12 गांव अति संवेदनशील हैं।
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माैसम विभाग के अनुसार, जिले में मानसून 15 से 25 जून के बीच आता है। जिले में गंगा तटीय इलाका करीब 35 किलोमीटर है। इसमें से कई गांव ऐसे हैं, जहां बाढ़ की स्थिति ज्यादा गंभीर होती है। डीघ ब्लॉक के कोनिया क्षेत्र के छेछुआ, भुर्रा, इटहरा और मवैया थानसिंह, हरिरामपुर बाढ़ के दृष्टिकोण से अति संवेदनशील की श्रेणी में हैं। यहां पर कटान की समस्या हर साल होती है। कोनिया क्षेत्र में गंगा का घुमाव होने के कारण जब-जब तेज हवाएं चलती हैं तो गंगा की लहरें तटों से टकराने पर कटान की स्थिति बनती है। -कलेक्ट्रेट में सुविधा के लिए राहत कंट्रोल रूम बनाया गया है।

यहां स्थापित होंगी बाढ़ चौकियां

औराई ब्लॉक में डेरवां, खमरिया, द्वारिकापुर, सहसेपुर तथा विकास खंड डीघ में धनतुलसी, लखनपुर, भदरांव, कटरा, इटहरा, कलिजरा, इनारगांव, बिहरोजपुर में बाढ़ चौकियां बनेंगी। सुरियावां में करियांव, अबरना, सांडा, रामनगर और भदोही में सर्रोई, मुंसीलाटपुर, तुलसीचक, मईहरदोपट्टी तथा ज्ञानपुर ब्लॉक में रमईपुर, मतेथु, कसियापुर, श्रीकांतपुर और भगवानपुर आदि गांवों में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई जाएंगी।
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प्रशासन की ये है तैयारी
बनने वाली बाढ़ चौकियां- 22
बाढ़ राहत शिविर की संख्या - 22
अति संवेदनशील गांव- 12
संवेदनशील गांव- 200
छोटी नावें- 40
बड़ी नावें- 15
मझली नावें- 10
मोटर बोट : तीन
गोताखोर- 13


कारगर नहीं हुई कटान रोधी व्यवस्था

छेछुआ और भुर्रा में गंगा कटान रोकने के लिए साल 2021-22 में पूर्व तीन करोड़ रुपये खर्च कर जिओ टेक्सटाइल ट्यूब कटर लगवाया गया था लेकिन यह व्यवस्था सफल नहीं हुई। किसानों का कहना है कटान रोकने के लिए जहां पर टेक्सटाइल ट्यूब स्थापित किए गए थे उससे अब लगभग 20 मीटर तक गंगा पश्चिम में बहने लगी है, यह व्यवस्था जरा भी कारगर साबित नहीं हुई।
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कटान से विस्थापित हो चुके है कई परिवार

गंगा से सटे 46 गांवों में प्रशासन की नजर रहती है, हालांकि सबसे अधिक छेछुआ, भुर्रा, मवैयाथान सिंह, नारेपार, इटहरा जैसे गांव बाढ़ से प्रभावित होते हैं। छेछुआ, भुर्रा में कई परिवार तो दो दशक में विस्थापित हो चुके हैं। 50 बिंद और 20 एससीएसटी परिवार भूमिहीन हो गया। छेछुआ गांव के बिनोद सिंह, रामू सिंह, जितेंद्र सिंह, श्यामू सिंह, धर्मेंद्र सिंह, यज्ञ वासिनी सिंह आदि की जमीन गंगा में समा चुकी है। हर साल आने वाली बाढ़ में दो बीघा उपजाऊ जमीन गंगा में समा जाती है।
- शुभांगी शुक्ला, एडीएम, वित्त एवं राजस्व ने कहा कि बाढ़ को लेकर कुछ माह पूर्व स्टेयरिंग कमेटी की बैठक हुई थी। जून में ही दूसरी बार बैठक कर सारी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाएगी। 15 जून से पहले बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी जाएंगी। बाढ़ जैसी संभावनाएं बनने पर हर तरह से तैयारियां पुख्ता हैं।
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