ज्ञानपुर। पशुपालन विभाग की टीम ने शनिवार को डीघ विकास खंड में संचालित गोशालाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान कई खामियां मिलीं। कंचनपुर में भूसा कम मिलने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेपी सिंह ने नाराजगी जताई।
गौशाला संचालन के नाम पर अब तक सभी छह ब्लॉकों से जुड़े दो दर्जन अस्थायी गोशालाओं पर तीन करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च हो चुकी है, लेकिन संरक्षित पशुओं को मिलने वाली सुविधाओं में कमी का रोना संचालक रो रहे हैं। जबकि विभागीय दावा है कि संचालकों की डिमांड पर प्रतिमाह संबंधित ब्लॉक अधिकारियों के खाते में रकम भेजी जा रही है। बावजूद इसके खानपान, रखरखाव, पेयजल, बाउंड्रीवाल, छाजन आदि की समस्याएं बनी हैं।
20 अस्थायी और तीन स्थायी गोशालाओं में 3300 से अधिक पशुओं में से अब तक दो सौ मवेशी दम भी तोड़ चुके हैं। इसका मुख्य कारण चिकित्सकीय अभाव बताया जा रहा है। टीम में शामिल उप सीवीओ डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि गोशाला संचालकों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीघ क्षेत्र के भावापुर, फुलवरिया में भूसे का भंडारण समुचित मिलने पर संतोष जताया। कंचनपुर में कम मिले भूसे की खरीदारी कर भंडारण करने का निर्देश दिया गया। इसी तरह ज्ञानपुर, अभोली और औराई ब्लॉक में चल रहीं गोशालाओं का भी निरीक्षण टीम ने किया।