राजकीय महिला महाविद्यालय औराई में अब स्नातकोत्तर की कक्षाएं भी चलेंगी हालांकि सीट कम होने से अभिभावकों में मायूसी छा गई है। हिंदी, समाजशास्त्र में 60-60 और गृह विज्ञान में मात्र 30 सीट होने से अभिभावक परेशान हैं। अभिभावकों ने निदेशालय और जनप्रतिनिधियों से सीट की संख्या बढ़वाने की मांग की।
जिले में वैसे तो केएनपीजी समेत 15 से अधिक महाविद्यालय हैं, लेकिन इसमें छात्र और छात्राओं सभी का प्रवेश होता है। 2001 में छात्राओं को बेहतर ढंग से उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए औराई में राजकीय महिला महाविद्यालय खुला। करीब डेढ़ दशक तक महाविद्यालय में स्नातक की शिक्षा छात्राओं को मिली।
इस सत्र से महाविद्यालय को स्नातकोत्तर की उपाधि मिल गई, जिससे स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को सहूलियत मिलेगी, लेकिन सीट की संख्या कम होने से अभिभावकों में मायूसी है।
गृह विज्ञान, समाजशास्त्र और हिंदी में सीटें इतनी कम है कि महाविद्यालय की छात्राओं को भी पूरा नहीं होगा। तीनों विषयों की पढ़ाई के लिए छह पद भी सृजित किए गए हैं, लेकिन आयोग से अब तक शिक्षक के न आने से अभिभावक आशंकित हैं कि पढ़ाई कैसे होगी।
इस संबंध में अभिभावक राजेंद्र दूबे, सुरेश तिवारी, मोहन सिंह, विनोद शुक्ल, सदानंद दूबे, मोतीलाल यादव, वीरेंद्र सिंह, आशीष, दिनेश दूबे ने जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए स्नातकोत्तर के विषयों की सीट 100 से 150 कराने की मांग की।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अपर्णा मिश्रा ने कहा कि सीट बढ़ाने और शिक्षकों के पद भरने के लिए निदेशालय को पत्र लिखा गया है। निदेशालय के दिशा-निर्देश पर ही आगे कुछ किया जाएगा।