ज्ञानपुर। सवा दो महीने के लॉकडाउन, बेमौसम बारिश ने सब्जी के कारोबार को तबाह कर दिया। मांग कम होने से सब्जियों का भाव इस कदर गिरा कि लागत भी निकलना मुश्किल हो गया। इससे परेशान किसानों ने खेतों में वैसे ही फसलों को छोड़ दिया। अब उसकी जुताई कर धान लगाने की जुगत में लग गए हैं।
कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में खेतों में अधिकतर लोगों ने सब्जी की बुआई की। मेहनत करने से सब्जियों का उत्पादन भी अच्छा हुआ, लेकिन साधन के अभाव में उन्हें मंडी तक नहीं भेजा जा सका। हालत यह हुई कि भिंडी, करेला, परवल, कोहड़ा, बैगन से लेकर अन्य सभी सब्जियों की कीमत पांच से 10 रुपये किलो पर ही रह गई। अप्रैल-मई और जून 2019 में 40 से 50 रुपये किलो बिकने वाली सब्जी पांच से आठ रुपये किलो बिकी तो किसान परेशान हो गए। कारोबार से लागत न निकलते देख सब्जी के खेत को वैसे ही छोड़ दिया। जिससे अधिकतर सब्जी सूखकर नष्ट हो गई। अनलॉक वन में भी अभी पूरी तरह से सुधार नहीं हो सका है। सब्जियों के भाव में नाममात्र का उछाल तो हुआ है, लेकिन वह भी नाकाफी ही है। इस दौरान आंधी बारिश से भी सब्जी की खेती करने वाले किसानों को काफी नुकसान हुआ।
- शादी-विवाह के सीजन को देखते हुए दो बीघे में भिंडी, करेला की खेती की थी। लॉकडाउन के कारण सब्जी बाहर नहीं जा सकी। आठ रुपये किलो की बिक्री होने पर घर से पैसा खर्च होने लगा। भिंडी को खेत में छोड़ दिया। - अनूप बिंद
- फायदा मिलने की उम्मीद से भिंडी और परवल की खेती एक बीघे में किया था। लॉकडाउन के कारण लागत भी नहीं निकल सकी। बाजार में बेचने के बजाए गांव वालों को ही काफी मात्रा में सब्जी फ्री में ही दे दिया।- त्रिलोकी नाथ
- एक बीघे में लौकी, नेनुआ, करेला की खेती किया था। लॉकडाउन और बारिश से काफी नुकसान हुआ। खेती में 15 हजार से अधिक का खर्च आया जबकि आधी लागत नहीं निकल सकी। जिससे काफी परेशानी हो रही है।- हरिशंकर यादव
- सब्जी की खेती कर अच्छी कमाई करता था। उसी उम्मीद संग छह बिस्वा में सब्जी की बुआई किया था लेकिन इस बार लागत भी नहीं निकल सकी। अब सब्जी की फसल को उखाड़कर धान की रोपाई कराएंगे। - बच्चन शुक्ला