जिले के कंधिया इलाके में वर्षों से विकसित किए जाने वाले स्पेशल इकोनामिक जोन की उम्मीदें बढ़ गई हैं। 220 हेक्टेयर में विकसित किए जाने वाले इस जोन में लगभग 1260 किसानों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। इसमें अब तक लगभग 1100 किसानों की जमीन को लेकर सहमति बन गई है। वहीं 160 किसानों के साथ जिला प्रशासन के वार्ता का दौर जारी है। जिला प्रशासन के स्तर से इस मामलों को पूरी गंभीरता से निस्तारित करने में जुटा है। जिसके बाद वहां स्पेशल इकोनॉमिक जोन विकसित करेगा।
जिले में दो दशक से अधिक समय से स्पेशल इकोनाॅमिक जोन विकसित करने का प्रस्ताव है। इसको लेकर काफी दिनों से किसानों के साथ बातचीत का दौर चल रहा है। किसानों की मुखर आवाज के कारण इसकी फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। हालांकि अब जिला प्रशासन की सक्रियता से वर्षों से ठप यह मामला एक बार फिर से गति से पकड़ रहा है। स्पेशल इकोनाॅमिक जोन के विकसित होने से कालीन उद्योग के चहुंमुखी विकास व उद्यमियों को एक ही कैंपस में निर्यात संबंधी समस्त सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 2002 में तत्कालीन केन्द्र सरकार ने कंधिया में सेज निर्माण को मंजूरी दी थी। इसके लिए भदोही-वाराणसी सीमा स्थित चार ग्रामसभाओं की 220 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने की योजना थी। इसमें अबत तक 1100 किसानों के जमीनों का मुआवजा भी दे दिया गया है, लेकिन अब भी लगभग 160 किसान जमीन के बदले जमीन की मांग पर अड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि जिला प्रशासन हमारी जमीन के बदले जमीन देने के बाद ही उस पर कब्जा कर सकती है। वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन उन्हें यह समझाने में जुटी है कि जमीन अधिग्रहण के बाद सभी किसानों को दूसरी जगह जमीन दे दिया जाएगा। हालांकि इस संबंध में जिला प्रशासन के साथ किसानों की वार्ता भी होनी है। एसडीएम शिवकुमार यादव ने बताया कि किसानों के साथ बातचीत का दौर जारी है। जल्द ही इस मसले को सुलझाकर स्पेशल इकोनाॅमिक जोन के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।