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उम्मीदें धूमिल, माह भर बाद भी नहीं मिली रकम

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ज्ञानपुर। धान क्रय केंद्रों पर बेचने के बाद भी किसानों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। भुगतान के लिए किसान विभाग के अफसरों के दफ्तार का चक्कर लगा रहे हैं। अभी भी किसानों का क्रय करने वाली एजेंसियों पर लगभग 21 करोड़ रुपये बकाया है।
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अभोली ग्राम पंचायत के सभाजीत यादव ने दो जनवरी को दुर्गागंज धान क्रय केंद्र पर 30 क्विंटल धान बेचा। करीब माह भर बाद उनका पैसा अब तक नहीं मिला। गौरा गांव निवासी सत्यराज डेढ़ माह से धान बेचकर पैसा आने का इंतजार कर रहे हैं। दो किसान तो बानगी हैं। करीब तीन हजार किसानों का 21 करोड़ क्रय एजेंसियों पर बकाया है। किसान क्रय केंद्र से लेकर बैंक का चक्कर लगा रहे, लेकिन अब तक उनके खाते में पैसा नहीं पहुंचा।
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन धरातल पर किसानों को जरूरी सुविधाएं कौन कहे बेचा हुआ माल की धन भी नहीं मिल पा रहा हैं। किसानों को उपज का सही मूल्य मिले, इसलिए ढाई माह पूर्व जिले में 58 धान क्रय केंद्र खुले। 90 हजार एमटी की बजाए अब तक एक लाख 15 हजार एमटी धान की खरीद हो चुकी है। विपणन और भारतीय खाद्य निगम के 11 केंद्र को छोड़कर अन्य केंद्र बंद हो चुुके हैं। 20 हजार 333 किसानों से धान की खरीद की गई, लेकिन अब भी तीन हजार किसानों का भुगतान फंसा हुआ है।
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तीन दिन पूर्व जिले में आए खाद्य एवं पूर्ति राज्यमंत्री रणवेंद्र सिंह ने किसानों का भुगतान जल्द से जल्द कराने का निर्देश दिया, लेकिन भुगतान में तेजी नहीं आ पा रही है। विभाग का दावा है कि एक सप्ताह में ढाई हजार किसानों के खाते में पैसा जा चुका है। पीएफएमएस में तकनीकी खामी के चलते किसानों के खाते में रकम विलंब से जा रही है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्रा ने कहा कि बंद हो चुकी कई एजेंसियों पर धान बेचने वाले किसानों का पैसा रुका है। उनसे बात कर पैसा भेजने का प्रयास किया जा रहा है।
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