ज्ञानपुर के प्रोफेसर कॉलोनी में घूमते आवारा कुत्ते। संवाद
ज्ञानपुर। सुबह टहलने वाले पर टहलते समय या रात के अंधरे में अकेले चलते समय सतर्क रहिए। लोगों को अकेले देखकर आवारा कुत्ते निशाना बना रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में हर महीने औसतन 6000 हजार लोगों को कुत्ते काट रहे हैं, जिन्हें विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। एक बार कुत्ता काटने पर चार इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
ज्यादातर कुत्ते 25 से 45 साल के बीच युवाओं को शिकार बना रहे हैं। लोग सुबह सुबह टहलने वाले या दौड़ने के लिए निकलते हैं। कुत्ते नजर लगाए बैठे रहते हैं। थोड़ा सा भी सहमने पर कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। कुत्ते को पकड़ने को लेकर किसी तरह की अभी दिशा निर्देश शासन से निकाय प्रशासन को नहीं मिला है।
यहां शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं है। खूंखार हो रहे कुत्ते हर महीने करीब 6000 लोगों को शिकार बना रहे हैं। जिले के 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर रोज 200 के करीब एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने लोग पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण अंचलों में रात तो शहर में सुबह टहलने वाले दौरान घटनाएं अधिक हो रही हैं। जिला अस्पताल में बीते तीन महीने में एंटी रैबीज इंजेक्शन की खपत बढ़ी है।
कुत्ता काटने पर चार इंजेक्शन : सौ शय्या अस्पताल के डॉ. सुशील शुक्ला ने बताया कि कुत्ता काटने के चार इंजेक्शन मरीज को लगाए जाते हैं। पहला इंजेक्शन 24 घंटे के अंदर, दूसरा तीसरे दिन, तीसरा इंजेक्शन सातवें दिन और चौथा इंजेक्शन 28वें दिन लगाया जाता है। कुत्तों के काटने के बाद एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगता है। बैक्टीरिया पनपने नहीं पाता है।