व्यापारी संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते एकमा के मानद सचिव, पीयुष बरनवाल। स्रोत-संवाद
उपायुक्त राज्य कर संजय कुमार सिंह ने कहा कि जीएसटी देनदारी समय पर भरें। जीएसटी रिटर्न फाइल करने के अलग अलग फाॅर्म निर्धारित हैं। किन कारोबारियों को कौन सा फार्म भरना अनिवार्य है इसकी जानकारी सभी को होनी चाहिए। यह जानकारी रख कर आप भविष्य में नोटिस से बच सकते हैं। उन्होने बताया कि आप कोई भी कारोबारी हों निर्धारित व्यवसाय का आंकड़ा पार करते ही आपको अनिवार्य रूप से जीएसटी पंजीयन कराना होगा। वह शनिवार को मर्यादपट्टी स्थित आल इंडिया कार्पेट मैन्यूफैक्चरर्स एसोशिएसन (एकमा) सभागार में व्यापारियों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक जीएसटी पंजीकृत व्यवसायी का स्वत: 10 लाख का दुर्घटना बीमा हो जाता है। व्यवसायी का किसी दुर्घटना में आकस्मिक मौत होने पर बीमित राशि दी जाती है। उन्होंने कहा कि शर्त यह है कि दुर्घटना की तिथि को आपका जीएसटी पंजीयन चालू हो। बताया कि यदि आपका चालू वित्त वर्ष में व्यावसाय 5 करोड़ पहुंच जाता है तो आपको अगले वित्त वर्ष में अनिवार्य रूप से ई-वे बिल निर्गत करना होगा। संवाद कार्यक्रम में उपस्थित व्यापारियों ने अपनी समस्याएं भी अधिकारियों के समक्ष रखीं। जिसका अधिकारियों ने जवाब भी दिए। इसके अलावा अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम के अलावा भी आपकी कोई समस्या है तो कार्यालयों में अधिकारी उनका निवारण करने के लिए बैठे हैं। इसके अलावा कार्यक्रम के मुख्य बिंदु रहे नए व्यापारियों का पंजीयन, राजस्व संग्रह में वृद्धि आदि रहा। कार्यक्रम में एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने कहा कि इस तरह के संवाद कार्यक्रम समय समय पर होते रहने से कारोबारियों को काफी सहूलियत हो जाएगी। संवाद कार्यक्रम में व्यापारियों, चार्टड एकाउंटेंटे तथा अधिवक्ताओं की ओर से महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। उपायुक्त राज्य कर अनिल दीक्षित ने भी संबोधित किया। संचालन राजेन्द्र पटेल सहायक आयुक्त राज्य कर खण्ड-3 ने किया। उप्र उद्योग व्यापार मण्डल के अध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता, उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमण्डल अध्यक्ष घनश्याम दास गुप्ता, अरशद वजीरी, सीए केपी दूबे, अशोक जायसवाल, राजेश गुप्ता, फिरोज अख्तर, एसएन पांडेय, दिलीप गुप्ता, राजेश जायसवाल, रवि जायसवाल, ताड़क नाथ जायसवाल, सुरेश साहू, अयोध्या साहू, प्रिंस गुप्ता, देवा जायसवाल, आदि रहे।