उपजिलाधिकारी न्यायालय से फर्जी दस्तखत कर जमीन हड़पने के प्रयास प्रकरण में शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने भदोही तहसील परिसर से एक आरोपी तहसीलदार के संबद्ध अहलमद को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया है। मुकदमे में तीन वे लोग संलिप्त हैं जिनके विरुद्ध एसडीएम ने रिपोर्ट भेजी थी। इसके अलावा जांच में तहसील में कार्यरत दो अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आई थी।
12 जून को पूर्व एसडीएम आशाराम ने मामले का खुलासा करते हुए अपने फर्जी हस्ताक्षर से फर्जी आदेश कराने के मामले से जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु को अवगत कराया था। बताते चलें कि क्षेत्र के हरियांव ज्ञानपुर रोड पर साजिश के तहत एसडीएम भदोही का फर्जी दस्तखत कर करोड़ों की जमीन हड़पने का प्रयास किया गया था। इस मामले की शिकायत डीएम को मिली तो जांच में तेजी आई। 12 जून को मामले की रिपोर्ट मिलने पर डीएम ने पहले एडीएम हरीलाल यादव से जांच आख्या मांगी। जिसमें एडीएम ने प्रथम दृष्टया संबद्ध अहलमद एवं लाभान्वित पक्ष को दोषी मानते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की सिफारिश की थी। हालांकि उन्होंने यह भी लिखा कि तत्कालीन तहसीलदार का बयान कि 24 जुलाई 2014 की उनकी रिपोर्ट पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं और जो हस्ताक्षर हैं वे फर्जी हैं साथ ही पत्रावली का आदान प्रदान भी किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं है। इस मामले में डीएम के निर्देश पर एसडीएम कार्यालय के पांच कर्मचारियों के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुखबीर की सूचना पर शुक्रवार को सुबह उप निरीक्षक प्रभुनाथ वर्मा ने तहसील परिसर से वांछित तहसीलदार के संबद्ध अहलमद होरीलाल पुत्र सदारी निवासी मूंसीलाटपुर को गिरफ्तार कर लिया। पांच आरोपियों में एक की गिरफ्तारी होते ही खलबली मच गई। माना जा रहा है कि चार अन्य आरोपी सफेदपोश से लेकर उच्चाधिकारियों तक अपनी पहुंच बताते हैं, जिससे उन पर पुलिस कार्रवाई से कतरा रही है। क्षेत्राधिकारी परमहंस मिश्र ने कहा कि आरोपी कितनी भी पहुंच वाले हों, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।