निराश्रितों के लिए आठ रैन बसेरा बने
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तीनों तहसीलों में अलाव और कंबल के लिए पांच-पांच लाख आंवटित
कंबल वितरण का दो टेंडर निरस्त, जल्द तीसरा जारी करेगा प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
ज्ञानपुर। बारिश के बाद कड़ाके की ठंड शुरू हो चुकी है, लेकिन जिले में बचाव के इंतजाम नाकाफी हैं। शासन से अलाव और कंबल के लिए आवंटित धनराशि तहसीलों में भेज दी गई, लेकिन अब तक कंबल की खरीद नहीं हो सकी। ऐसे में 10 से 12 दिनों के बाद ही वितरण संभव है। निराश्रितों के लिए प्रशासन की ओर से आठ रैन बसेरा बने हैं।
ठंड शुरू होने के साथ ही विक्षिप्त, गरीब, भिखारियों की मुसीबत बढ़ जाती है। दिन तो वह किसी तरह काट लेते हैं, लेकिन रात गुजारना मुश्किल हो जाता है। अक्सर ठंड लगने से ऐसे लोगों की जान भी चली जाती है। शहरी क्षेत्रों में सड़क किनारे फुटपाथ पर रात के समय गरीबों और असहायों के रात में सोते समय वाहनों से होती दुर्घटनाएं सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने समस्या को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। साथ ही प्रदेश सरकार को हर बाजार और शहर में रैन बसेरा बनाने का निर्देश दिया था। इससे गरीबों, भिखारियों, फुटपाथियों आदि असहायों को रात के समय सुकून की नींद मिल सके। ठंड शुरू होने के बाद ही प्रशासन की ओर से ज्ञानपुर में सामुदायिक भवन, गोपीगंज में नगर पालिका कार्यालय समेत भदोही, घोसिया, सुरियावां, खमरिया और नई बाजार में कुल आठ रैन बसेरा बनाए गए।
तीनों तहसीलों में गरीबों को कंबल वितरण और अलाव जलवाने के लिए पांच-पांच लाख तहसीलों में भेजा जा चुका है, लेकिन अलाव अब तक नहीं जला। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि कंबल वितरण के लिए दो टेंडर हुए, लेकिन खामी से निरस्त हुए। तीसरा टेंडर जारी कर जल्द ही कंबल वितरण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने का निर्देश दिया गया।
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गड़बड़ी में लटका आश्रय गृह का हैंडओवर
ज्ञानपुर। गरीबों, निराश्रितों और असहायों को रात गुजारने के लिए एक करोड़ 29 लाख की लागत से बना आश्रय गृह भी धांधली के भेंट चढ़ गया। इससे नगर पंचायत उसे हैंडओवर नहीं कर रही है। भवन तो करीब दो माह से बनकर तैयार है, लेकिन अंदर फिनिशिंग का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। कार्यदायी संस्था महीने भर से हैंडओवर करने में जुटी थी, लेकिन मामला लटक गया है। आश्रय ग़ृह के संचालन के लिए फर्म ग्रामीण उद्यमिता विकास संस्थान का चयन भी हो चुका है। ईओ ज्ञानपुर राजेंद्र दूबे ने कहा कि छत निर्माण में कुछ दिक्कत है। प्रशासनिक अधिकारी का निरीक्षण होने के बाद ही हैंडओवर किया जाएगा।