करीब आठ दिनों तक तेजी से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर बुधवार की देर रात से घटने लगा है। दो सेमी प्रति घंटे से जलस्तर घट रहा है लेकिन लोगों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। कोनिया के 12 से अधिक गांव में पानी कम हुआ लेकिन दुश्वारियां बरकरार है। मिजापुर- औराई मार्ग पर टेढ़वा के समीप करीब चार फीट पानी भरा होने से तीसरे दिन भी वाहनों का आवागमन बंद रहा। सभी वाहन गोपीगंज से होकर वाराणसी, जौनपुर की ओर गए।
पिछले दिनों हुई बारिश और बांध से पानी छोड़ने के चलते गत आठ दिनों से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर आखिरकर बुधवार की रात से घटने लगा। बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहे लोगों के लिए यह राहत भरी खबर जरूर है, लेकिन मुश्किलें अब भी कायम है। 81.020 मीटर तक पहुंच चुका जलस्तर बृहस्पतिवार की शाम पांच बजे तक 80.600 मीटर तक पहुंच गया। दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहे जलस्तर से कई इलाकों में पानी घटने लगा है, जहां-जहां से पानी घट रहा है वहां गंदगी का अंबार दिखने लगा है। सीतामढ़ी संवाददाता के अनुसार, गंगा का जलस्तर घटने से तलवा, मनीपुर, इटहरा, कलिकमवैया, मवैयाथानसिंह, बसगोतीमवैया, भदराव, हरिरामपुर में किसानों के खेतों से पानी कम होने लगा है, हालांकि कई दिनों तक पानी में डूबे रहने से फसल नष्ट हो चुकी है। गावों में पानी कम होने से जगह-जगह गंदगी दिखने लगी है।
औराई संवाददाता के अनुसार, गंगा के जलस्तर में कमी होने के बाद भी औराई- मिर्जापुर मार्ग पर टेढ़वा के पास चार फीट पानी लगा हुआ है। तीसरे दिन भी बड़े और छोटे वाहनों के आवागमन पर रोक लगी रही। वाराणसी, जौनपुर जाने वाले वाहन गोपीगंज से होकर निकले। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
खमरिया संवाददाता के अनुसार, बाढ़ के पानी से इलाके में कई बीघे फसल डूबी हुई है। जलस्तर कम होने के बाद भी कई मार्ग अब भी डूबे हुए हैं, इससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।