विकास को ताक पर रख स्वार्थ के लिए कार्य कर रहे हैं। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश का अब तक अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। वह शनिवार को दुर्गागंज त्रिमुहानी स्थित रोडवेज परिसर में पार्टी के धरने में बोल रहे थे।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में जब नेता होते तो उद्योग लगता और बंद पड़े कारखाने चालू होते। प्रशासनिक दक्षता, विकास के लिए छोटे राज्यों का गठन जरूरी है।
इसलिए पूर्वांचल राज्य का गठन होने चाहिए।
दस जिले का तेलगांना प्रदेश बन सकता है, तो 27 जिलों वाला पूर्वांचल क्यों नहीं। बताया कि भाषा के आधार पर 1956 में राज्य गठन के लिए आयोग बना।
इससे बड़े-बड़े राज्य बन गए,आजादी के 68 वर्ष बाद हाल ये हुआ कि जो छोटे राज्य हैं। वह विकास कर गए, बड़े राज्य विकास के लिए अब तक तरस रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में पूर्वी उ. प्र.के युवाओं को नौकरी के लिए अन्य प्रदेशों में जाना पड़ रहा है, जहां उन्हें अपमान ही मिलता है। इस मौके पर रामराज चौहान,डॉ.एससी वर्मा,विंध्यवासिनी त्रिपाठी , विनय तिवारी, सुभाष मिश्र, गामा पटेल, जवाहर लाल, राकेश यादव,जयकृष्ण,सत्यम, राजेश्वर, चंद्रमणि, विनोद, अजय, दिलीप आदि थे।