जिले के 157 विभागों में ई-आफिस व्यवस्था शुरु हो गई है। यहां की सभी पत्रावली डिजिटल हो चुकी है। इससे फाइलें नष्ट होने का जहां खतरा नहीं होगा।
वहीं एक क्लिक पर जरुरी जानकारी मिल जाएगी। अब तक राजस्व और विकास की करीब चार हजार फाइलें डिजिटली अग्रसारित हो चुकी हैं।
कार्यों में पारदर्शिता लाए जाने के लिए सरकार की मंशा के अनुरूप ई-ऑफिस की शुरुआत की गई है। जिले में पहले कलेक्ट्रेट में इस व्यवस्था को लागू किया गया। उसके बाद विकास भवन समेत अन्य दफ्तर शामिल हुए। धीरे-धीरे 157 विभाग डिजिटल हो चुके हैं। अब लिपिक पत्रावलियों पर डिजिटल हस्ताक्षर कर उनको संबंधित अधिकारी को भेज देंगे। जिसका डीएम द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर से ही अनुमोदन दिया जाएगा।
फाइलों पर हस्ताक्षर कराने के लिए मिलने की जरूरत नहीं होगी। इससे कागजों के बोझ से मुक्ति मिलेगी साथ ही सरकारी राजस्व की बचत होगी। जिले में कलेक्ट्रेट, विकास भवन, बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा समेत कुल 213 विभाग संचालित हैं।
इसमें 40 से 45 विभाग ऐसे हैं, जहां फाइलों का आदान-प्रदान कम होता है। महीने या दो महीने में ही कोई फाइल उच्चाधिकारियों के पास भेजी जाती है।
जिसको देखते हुए 213 में 157 विभागों में ई-आफिस व्यवस्था शुरू कर दी गई है। फाइलों को कागज के बजाय इलेक्ट्राॅनिक रूप से संग्रहीत किया जा रहा है। इससे फाइलों के खोने और नष्ट होने का खतरा भी समाप्त हो गया है। शासकीय कार्यालयों की फाइल उच्च अधिकारियों को अब एक क्लिक पर मिल जाएगी। लंबित पत्रावलियों का आसानी से अधिकारियों को पता चल सकेगा। कार्यालयों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होगी। नई व्यवस्था से ऑनलाइन प्लेटफार्म पर सरकारी डेटा सुरक्षित रहेगा।सीडीओ बालमुकुंद शुक्ला ने बताया कि ।157 विभागों में ई-आफिस व्यवस्था शुरु हो चुकी है। जहां से फाइलों का आदान प्रदान डिजिटली हो रहा है। इससे काम का बोझ कम होगा और व्यवस्था पारदर्शी होगी।
ईडीएम आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि ई-आफिस व्यवस्था से काम पारदर्शी ढंग से होगा। पत्रावली से कोई छेड़छाड़ नहीं हो पाएगा। जून तक राजस्व की 2788 और विकास की 1700 से अधिक फाइलें डिजिटल रुप से अग्रसारित हो चुकी है। जून में प्रदेश स्तर पर जिले को 15वीं रैंक मिली।