पंचायत चुनाव के छह माह बाद भी अफसरों की उदासीनता से 561 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़ा है। राज्य वित्त और 14वें वित्त का करीब 29 करोड़ ग्राम पंचायतों के खातो में डंप पड़ा है। नियमों के चक्कर में ज्यादातर ग्राम पंचायतों में कार्ययोजना पूरी नहीं हो सकी। जिन गांव में कार्ययोजना बनी है वहां के ग्राम प्रधान ब्लॉक और विकास भवन का चक्कर काट रहे हैं। प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर उनमें नाराजगी है।
अक्तूबर-नवंबर में पंचायत चुनाव के बाद ग्रामसभाओं में विकास की आस जगी थी। केंद्र सरकार ने 14वें वित्त में ग्राम पंचायतों में पहले से अधिक बजट भी दे दिया लेकिन चुनाव के छह माह बाद भी ग्राम पंचायतों का विकास कार्य ठप पड़ा है। ग्राम पंचायतों के पैसे से लाल हो रहे ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की धांधली और बंदरबाट रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के तहत गांव में खुली बैठक कर पांच वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।
कार्ययोजना के आधार पर गांव में विकास कार्य कराए जाएंगे। ग्राम प्रधान 50 हजार तक ही खर्च कर सकेंगे। ग्रामसभाओं में ज्यादातर कार्य 50 हजार से अधिक होने पर ग्राम प्रधान ब्लॉक और विकास भवन का चक्कर काट रहे हैं लेकिन कार्ययोजना तैयार न होने से राज्य वित्त का 13 करोड़ और 14वें वित्त का 16 करोड़ डंप पड़ा है। नियमों में उलझकर ग्राम प्रधान कार्ययोजना तैयार नहीं करा पा रहे हैं। कुछ ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना तैयार है तो उसकी स्वीकृति कराने के लिए पापड़ बेलना पड़ रहा है।