सीतामढ़ी। रंग-बिरंगे फूलों की व्यावसायिक खेती से जीविकोपार्जन करने वाले किसानों और माली समाज के लोगों के समक्ष लॉकडाउन के चलते गंभीर संकट पैदा हो गया है। स्थिति यह है कि खेतों में तैयार गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी के रंग-बिरंगे फूल खेतों में ही मुरझा गए हैं। इससे फूलों की खेती पर निर्भर माली समाज को घर चलाना मुश्किल हो गया है।
फूलों की खेती से जुड़े कोनिया के इटहरा निवासी विशाल पुष्कर का कहना है कि मार्च के अंतिम सप्ताह से पूरे मई जून तक शादी विवाह के साथ धार्मिक और मांगलिक कार्यक्रमों का मुख्य सीजन रहता है। इसी समय फूलों का अच्छा उत्पादन और मुनाफा होता है। इसके अलावा धार्मिक स्थलों पर फूल की सप्लाई की जाती है, लेकिन लॉक डाउन से पूरे माली समाज के लोग भारी आर्थिक तंगी में आ गए हैं। बताया कि एक बीघे फूल की खेती पर लगभग 20 हजार का खर्च आता है। इससे 50 से 60 हजार के फूलों का उत्पादन हो जाता है, लेकिन इस सीजन में खेती में घर की लागत भी डूब गई। खेती डीघ, कोइरौना, इटहरा आदि गांवों में की जाती है। हजारी माली, विशाल माली, दिनेश माली, वीरेंद्र पुष्कर, श्यामधर माली, आदि का कहना है कि फूलों के पेड़ खेत में ही मुरझा रहे हैं। गुलाब, गेंदा का फूल सूख गए जो पूंजी खेती में लगाया था वह भी डूब गई। माली समाज के लोगों ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन से मांग की है कि गरीब किसानों को क्षतिपूर्ति दी जाए।