तीन तरफ गंगा से घिरे पूरे कोनिया क्षेत्र में शुद्ध पेयजल एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आ रहा है। इलाके के सभी गांव गंगा के आसपास है, जिसके कारण पेयजल का संकट तो नही है, लेकिन भूजल दूषित होने से ग्रामीण पानी के साथ मीठा जहर पीने को मजबूर है। इसका लोगों के सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। करीब डेढ़ दशक पूर्व पानी में आर्सेनिक की पुष्टि होने के बाद पीने की सलाह नहीं दी गई थी लेकिन लोगों को मजबूरन वही पानी पीना पड़ रहा है।
धार्मिक एवं पौराणिक स्थली सीतामढ़ी के आसपास के गांव कलातुलसी, धनतुलसी, भदराव, इटहरा, शेरपुर,डीघ, बनकट, कुड़ी, नारेपार, बारीपुर, मनोहरपुर में पेयजल की समस्या नहीं है, लेकिन हैंडपंपों से अत्यधिक आयरन युक्त पानी निकलता है, जो लोगों के स्वास्थ्य की दृष्टि से नुकसानदायक है। कलातुलसी निवासी अधिवक्ता छोटेलाल शुक्ला, श्रीकांत शुक्ला, शेरपुर के प्रधान शिवचंद शुक्ला, ओमप्रकाश दुबे, छेछुआ के अमर बहादुर सिंह, इटहरा के अम्बुज मिश्रा, बनकट के गोरेलाल मिश्रा, डीघ के नंघु तिवारी ने कहा कि इलाके में हैंडपंप का पानी पीने योग्य नही है, लेकिन दूषित पानी पीना मजबूरी है, क्योंकि दूसरा कोई भी बिकल्प नही है।
इनसेट
10 फीट नीचे खिसका जलस्तर
सीतामढ़ी। प्रचंड धूप एवं बढती गर्मी के चलते कोनिया के तीन गांवों के भूजल स्तर में लगभग दस फिट की गिरावट आयी है वैसे तो लगभग पूरे क्षेत्र के गांवों का जलस्तर लगभग पांच फीट खिसका है, लेकिन डीघ, खेमापुर और अरई गांव के पानी का जलस्तर लगभग दस फिट तक नीचे चला गया है। जल निगम के ठेकेदार माताचरन तिवारी ने बताया की पूरे कोनिया क्षेत्र का जल स्तर लगभग 70 फिट है लेकिन उक्त तीनो गावो के कई हैंडपंपों से पानी निकालना काफी कम हो गया था, जिसमें 10 फिट की पाइप जोड़ने पर भरपूर पानी निकालने लगा।