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बड़ी कार्रवाईः प्रसव पीड़िता को 45 लाख मुआवजा देने का आदेश, इलाज के दौरान काट दिया था आंत; ऐसे बची थी जान

Mon, 29 Apr 2024 08:30 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, भदोही

सार

Bhadohi News: आयोग की ओर से किसी पीड़ित को यह सबसे बड़ी क्षतिपूर्ति राशि दिलाई गई है। इसके पहले आयोग ने 33 लाख रुपये क्षतिपूर्ति दिए जाने का निर्देश दिया था। आयोग ने डॉ. अभय सिंह मेमोरियल अस्पताल की संचालिका गीतू सिंह के खिलाफ यह फैसला सुनाया।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रसव पीड़िता के ईलाज में लापरवाही बरतना एक चिकित्सक को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पीड़ित को 45 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश सुनाया।

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कोर्ट ने चिकित्सक को वाद प्रस्तुत करने की तिथि से क्षतिपूर्ति राशि पर 12 फीसदी ब्याज की दर से पीड़ित को भुगतान करने के साथ ही 10 हजार वाद खर्च देने का निर्देश दिया।

उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि ज्ञानपुर के रामपुर निवासी क्षमा पांडेय व उनके पति कुलदीप पांडेय समेत अन्य ने 13 फरवरी 2023 को डॉक्टर अभय सिंह मेमोरियल हॉस्पिटल, गोपीगंज संचालिका गीतू सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 
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पीड़ित ने बताया कि उनके प्रसव सर्जरी में अस्पताल की ओर से लापरवाही बरती गई। पीड़ित के अधिवक्ता प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पीड़िता गर्भवती क्षमा पांडे 17-18 फरवरी की रात प्रसव पीड़ा होने पर गोपीगंज के डॉ. अभय सिंह मेमोरियल असप्ताल पहुंचे। 

यहां नार्मल डिलवरी की बजाय आपरेशन की सलाह दी गई और पीड़िता के परिजनों से 30 हजार ऑपरेशन के लिए और 10 हजार की दवा दी गई। जिसका कोई रसीद भी नहीं दिया गया।

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लापरवाह चिकित्सकों ने आयोग को नहीं दिया कोई जवाब

चिकित्सक गीतू सिंह ने लापरवाही पूर्वक इलाज करते हुए गर्भवती को आंतों को काट दिया गया। जिससे पूरे शरीर में संक्रमण हो गया और रक्तस्राव होने लगा। जिसके बाद वे वहां से पीड़िता को रेफर कर दिया। उसके बाद वे कई नामचीन अस्पतालों में पहुंची।

अंतत: बनारस के एक निजी अस्पताल में लंबे खर्च के बाद किसी तरह उनकी जान बच सकी। इसके बाद पीड़िता की ओर से चिकित्सक के खिलाफ गोपीगंज कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया।

विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल हुआ। उपभोक्ता आयोग में शिकायत के बाद चिकित्सक व अस्पताल को नोटिस जारी की गई, लेकिन कोई उपस्थित नहीं हुआ। 

इस पर एक पक्षीय सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के न्यायाधीश संजय कुमार डे, सदस्य विजय बहादुर सिंह की पीठ ने पीड़ित को 45 लाख क्षतिपूर्ति देने के साथ ही वाद दाखिल करने की तिथि से निर्णय की तिथि तक क्षतिपूर्ति राशि पर 12 फीसदी ब्याज की दर से देने का निर्देश दिया।

वहीं वाद खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि दो माह के अंदर समस्त धनराशि ब्याज सहित भुगतान नहीं किया जाता है तो समस्त धनराशि पर निर्णय की तिथि से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 18 फीसदी ब्याज की दर से भुगतान करना होगा।
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