चिकित्सक गीतू सिंह ने लापरवाही पूर्वक इलाज करते हुए गर्भवती को आंतों को काट दिया गया। जिससे पूरे शरीर में संक्रमण हो गया और रक्तस्राव होने लगा। जिसके बाद वे वहां से पीड़िता को रेफर कर दिया। उसके बाद वे कई नामचीन अस्पतालों में पहुंची।
अंतत: बनारस के एक निजी अस्पताल में लंबे खर्च के बाद किसी तरह उनकी जान बच सकी। इसके बाद पीड़िता की ओर से चिकित्सक के खिलाफ गोपीगंज कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया।
विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल हुआ। उपभोक्ता आयोग में शिकायत के बाद चिकित्सक व अस्पताल को नोटिस जारी की गई, लेकिन कोई उपस्थित नहीं हुआ।
इस पर एक पक्षीय सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के न्यायाधीश संजय कुमार डे, सदस्य विजय बहादुर सिंह की पीठ ने पीड़ित को 45 लाख क्षतिपूर्ति देने के साथ ही वाद दाखिल करने की तिथि से निर्णय की तिथि तक क्षतिपूर्ति राशि पर 12 फीसदी ब्याज की दर से देने का निर्देश दिया।
वहीं वाद खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि दो माह के अंदर समस्त धनराशि ब्याज सहित भुगतान नहीं किया जाता है तो समस्त धनराशि पर निर्णय की तिथि से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 18 फीसदी ब्याज की दर से भुगतान करना होगा।