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ई-कामर्स को मौका मिलने से आफलाइन स्टोर्स संचालकों में बेचैनी

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भदोही। ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बुकिंग और बिक्री शुरू होने की सुगबुगाहट से स्थानीय दुकानदार और शोरूम संचालकों में खलबली मचा दी है। लोगों का कहना है कि सरकार को बड़ी मछलियों की फिक्र तो है, लेकिन छोटे, मझोले दुकानदारों की जीविका की ओर ध्यान नहीं है। लोगों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि पहले ऑफलाइन स्टोर्स खुलवाए, जहां से तमाम एक बड़े तबके को राहत प्रदान की जा सकती है। लोगों ने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो मध्यम तबके के लिए भारी अन्याय होगा।
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लगभग एक महीने से पूर्ण लाकडाउन का पालन किया जा रहा है। सरकार को मालूम है कि इससे कौन लोग प्रभावित हैं। या तो हमारे मैकेनिक अथवा डोरस्टेप सर्विस देने वाले। उनकी रोजी रोटी कैसे चल रही है कोई पूछने वाला नहीं है। राहत दिए जाने की शुरूआत यदि आनलाइन स्टोर्स से होगी तो निश्चित रूप से यह गरीबों के साथ अन्याय होगा। सरकार को इस पर सोचना होगा। प्रमोद कुमार पांडेय, कंप्यूटर उत्पाद विक्रेता
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सरकार अमेजान, फ्लिपकार्ट जैसी भारी कंपनियों को उत्पाद बेचने की अनुमति देने जा रही है। अगर राहत का अधिकार आज किसी को है तो मध्यम तबके को है। शहरों में फैले तमाम ऐसे शोरूम, दुकानें हैं जिनसे कई कई लोगों की रोजी रोटी चल रही है। ऐसे में पहले ऑफलाइन शोरूमों के बारे में सोचना जरूरी होगा। आवश्यक दिशा निर्देशों के साथ हमें भी अपना स्टोर खोलने की इजाजत मिले। अजय गुप्ता, इलेट्रानिक्स उत्पाद विक्रेता
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बड़ी बड़ी ई-कामर्स कंपनियों के पास संसाधनों की कमी नहीं हैं। बावजूद इसके सरकार पहले उन्हीं का ध्यान दे रही है। हम कम संसाधन में शहरों में सेवाएं दे रहे हैं। आज हम न सेल्स कर पा रहे हैं ना सर्विस दे पा रहे हैं। ग्राहकों को भी हमारी जरूरत है। लेकिन सरकार का पहुंच वालों की ओर है हमारी ओर नहीं। उचित गाइडलान के साथ हमें भी स्टोर्स खोलने का मौका मिलना चाहिए। गया प्रजापति, इलेक्ट्रानिक्स-फर्निचर उत्पाद विक्रेता
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