हाईवे किनारे स्थित नाला की गंदगी मुख्य लेन पर हिलोरें मारने के लिए बेताब है। दुर्गंध से बेहाल राहगीरों ने हाईवे प्राधिकरण से नाला की सफाई कराने की मांग की है। सफाई नहीं होने से नाराज लोगों ने बताया कि लगभग चार वर्ष में एनएचएआई ने हंडिया-राजातालाब के वाराणसी-प्रयागराज हाईवे को छह लेन में बदलने के लिए काफी धनराशि खर्च की है, लेकिन अपनी संपत्ति की देखरेख करने के प्रति प्राधिकरण उदासीन रवैया अपना रहा है। जिसका खामियाजा राहगीरों और हाईवे के किनारे रहने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करके भुगतना पड़ रहा है।
रविवार को जंगीगंज से गोपीगंज की ओर आ रहे साइकिल सवार मनीष ने बताया कि मुख्य लेन पर बारिश का पानी एकत्र नहीं होने देने के लिए प्राधिकरण ने उत्तरी, दक्षिणी सर्विस लेन के बीच में भारी भरकम नाला का निर्माण किया है। नाला का निर्माण होने के बाद से अब तक वही स्थिति बनी हुई है जो दो वर्ष पूर्व थी। बारिश का पानी एक से दूसरे छोर की ओर नहीं निकलता और उसी नाला में शौचालय, नाबदान तथा यहां तक कि लोग घरों से निकलने वाला कूड़ा-करकट, दोना-पत्तल भी उसी में फेंक रहे हैं। इससे नाला जाम हो गया है और सफाई के अभाव में बजबजा रहा है। इससे निकलने वाले दुर्गंध के कारण राहगीरों व आसपास रहने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब यह स्थिति है कि नाला के पास चाहे पैदल जाने वाले राहगीर हों या वाहन चालक उन्हें दुर्गंध से परेशान होने के लिए विवश होना पड़ता है। गिराई के पास खड़े ट्रक चालक सतीश ने कहा कि जब हाईवे पर छह लेन नहीं बना था, तब वाहन में खाना भी बनाकर खा लिया जाता था, लेकिन अब दुर्गंध के कारण खड़े वाहन में बैठना मुश्किल हो जाता है। तिपहिया ट्राली पर आइसक्रीम बेचने जा रहे नंदू ने कहा कि एनएचएआई की तरफ से नगर क्षेत्र के नाला को जैसे-तैसे ढकवा दिया गया है, जिससे दुर्गंध नहीं उठ पाती है। एनएचएआई ग्रामीण क्षेत्र में खुले नाला को ढकवाने की व्यवस्था नहीं कर सका है और न ही इसे ढंके जाने के आसार दिख रहे हैं। बारिश शुरू होने से पहले एनएचएआई के मेंटेनेंस अनुभाग के अधिकारियों को बजबजा रहे नाला का निरीक्षण कर गंदे पानी की निकासी और कूड़े-कचरे की सफाई कार्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बाइक सवार नावेद आलम ने कहा कि हाईवे प्राधिकरण द्वारा छह लेन का निर्माण कराकर मेंटेनेंस की जिम्मेदारी एक संस्था को सौंपे जाने से यही लग रहा था कि स्थानीय स्तर की समस्याएं दूर हो जाएंगी। मेंटेनेंस कर्मी टोल फ्री वाहन के साथ प्रतिदिन 70 किलोमीटर का चक्रमण करते हैं, लेकिन उनका ध्यान बजबजा रहे नाला की तरफ नहीं जाता है। छात्र महेश कुमार यादव ने पानी निकालने के लिए साइफन पर हुए अतिक्रमण को चिह्नित कर सख्ती से साइफन को खोलवाने की आवश्यकता जताई। मेंटेनेंस अधिकारी वीरेंद्र कुशवाहा का कहना है कि हाईवे प्राधिकरण ने नाला का गंदा पानी निकलने के लिए उन्हीं स्थानों पर पुलिया का निर्माण किया है, जहां 15 वर्ष पहले पुलिया थी। छह लेन की लंबाई, चौड़ाई बढ़ने से अब जमीन नहीं बची है। ताकि हाईवे प्राधिकरण की गाइड लाइन के पालन के लिए कोई प्रयास किया जा सके। जहां पानी निकलने की व्यवस्था दी गई है, वहां अतिक्रमण है। अतिक्रमण को लेकर सख्ती की जाएगी। जल्द ही अतिक्रमण हटाकर गंदे जल की निकासी की व्यवस्था की जाएगी।