पतित पावनी मोक्ष दायिनी गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं। उसमें भी यदि मौनी अमावस्या के दिन कोई गंगा में स्नान करता है तो उसका पुण्य लाभ काफी ज्यादा होता है। इस बार मौनी अमावस्या एक फरवरी यानी मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन जिले के रामपुर और सीतामढ़ी गंगा घाट पर स्नान के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। सेमराधनाथ में लगे कल्पवास मेला स्थल पर भी काफी संख्या में पहुंचकर लोग स्नान करते हैं। स्नान की तैयारी तेज हो गई है।
प्रयाग और काशी के बीच बसे भदोही जिले के करीब 45 गांवों से होकर पतित पावनी गंगा बहती हैं। वाराणसी और प्रयागराज भी स्नान करने के लिए लोग जाते हैं। प्रयागराज में संगम तट पर जाने के साथ ही जिले के सेमराधनाथ, रामपुर, सीतामढ़ी, गुलौरी, इब्राहिमपुर, कलिंजरा, बेरवापहाड़पुर, बारीपुर, धनतुलसी आदि क्षेत्रों में भी गंगा स्नान के लिए लोग पहुंचते हैं। डुहिया भाव सिंहपुर निवासी पं. दीनानाथ शुक्ला का कहना है कि इस बार मंगलवार को मौनी अमावस्या है। इस दिन मौन रहकर स्नान करना पुण्य फलदायक है। काशी से प्रकाशित श्री महावीर पंचाग के अनुसार मौनी अमावस्या का प्रसिद्ध पर्व व स्नान मंगलवार को ही है। अमावस्या दिन में 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। अमावस्या उदया तिथि में पड़ रही है। इसलिए इसका मान रात-दिन रहेगा। भौमवती अमावस्या का मणि कांचन योग गंगा स्नान के महत्व को कई गुना बढ़ा रहा है। प्रयागराज के त्रिवेणी एवं काशी के दशाश्वमेध घाट तथा पश्चिम वाहिनी गंगा में स्नान करना अति पुण्य फलदायक है।