घोसिया। रबी फसल की कटाई के बाद खेतों की दो बार गहरी जुताई मृदा शक्ति और फसलों के उत्पादन के लिए लाभदायक है। यह तकनीकी जानकारी मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के फसल सुरक्षा विशेषज्ञ डा.मनोज कुमार पांडेय ने दी।
उन्होंने बताया कि मानसून से पहले होने वाली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से या उपयुक्त यंत्रों से होनी चाहिए। तेज धूप में खेतों के ढाल के आर-पार गहरी जुताई इस प्रकार की जाती है कि खेत की मिट्टी की ऊपरी पर्त को गहराई तक खोलकर और नीचे की मिट्टी को पलटकर ऊपर लाया जा सके। इसका उद्देश्य सूर्य की तपती धूप में तपा कर खेत की उपजाऊ मिट्टी को खरपतवार के बीजों से मुक्त रखने, कीटाणु-रोगाणु रहित करना है। मानसून पूर्व पड़ने वाली बौछार मृदा को पुन: शक्ति प्रदान करती है। गर्मी में जितनी बार गहरी जुताई होगी, उसी पर खरपतवारों की सघनता निर्भर होती है। सावधानी रहे कि 9 से 10 इंच तक जुताई का मानक तय करना चाहिए। मानसून में हैरो, कल्टीवेटर, रोटावेटर से जुताई करने पर खेत में भुरभुरा होकर बुआई-रोपाई के लिए तैयार होकर जल धारण क्षमता बढ़ाती है। खरपतवार के बीज और जड़ें नष्ट हो जाते हैं। अप्रैल - मई में गहरी जुताई के लिए 20 से 30 सेंटीमीटर तक गहरे हल चलाएं। खरपतवार होने की स्थिति में 10 से 15 दिन के अंतराल में दूसरी जुताई करें। जुताई का समय सुबह सात से 11 बजे तक और शाम को चार से छह बजे तक होना चाहिए। जुताई के साथ मेड़ों की सफाई-बंधाई और चौड़ाई का ध्यान रखना जरूरी है।