घर में शौचालय का होना कितना जरूरी है, इसका अहसास आज हमें हुआ है, बहू ने आंख खोल दी है, अब जब तक घर में शौचालय नहीं बनेगा, कोई दूसरा काम नहीं करूंगा। इसके लिए जो करना होगा करूंगा, जिसके पास जाना होगा जाऊंगा। यह कहना है औराई विकास खंड के चकबीरा (शुकुलपुर) गांव के शर्मा बस्ती निवासी प्रेम सागर शर्मा का।
बहू की विदाई करने उसके मायके गए प्रेम सागर ने बताया कि उनके बेटे अनिल की शादी 11 जुलाई 2013 को वाराणसी के भेलूपुर निवासी तेजू शर्मा की नातिन खुशबू शर्मा के साथ हुई थी।
खुशबू के माता-पिता की बचपन में ही मौत हो गई थी, इसलिए वह अपने नाना तेजू शर्मा के यहां भेलूपुर में ही रहती थी। नाना से बातचीत के बाद ही रिश्ता तय हुआ था। शादी के बाद जब बहू यहां आई तो घर में शौचालय नहीं होने पर परेशान हो गई। उसे शौच के लिए खेत में जाना अच्छा नहीं लगता था, जिसके लिए वह कई बार अपनी सास से कह चुकी थी, लेकिन वे लोग पैसे की तंगी के कारण शौचालय नहीं बनवा पा रहा था। करीब आठ माह पूर्व खुशबू अपने मायके गई थी।10 मार्च को जब वह उसे लेने के लिए उसके नाना के यहां भेलूपुर गए थे, तब खुशबू ने ससुराल आने से इनकार कर दिया। उनके सामने शर्त रख दी कि जब तक घर में शौचालय नहीं बनेगा, वह वापस ससुराल नहीं आएगी। इस बात से उस समय तो उन्हें काफी बुरा लगा लेकिन घर पर पत्नी एवं अन्य लोगों से बात करने पर अहसास हुआ कि बहू का कहना सहीं है। बहू ने उनकी आंखें खोल दी।
महिलाओं को शौच के लिए बाहर जाने में कितनी परेशानी होती है, इसका अहसास हो गया। उन्होंने तत्काल गांव के प्रधान से संपर्क किया तथा पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। ग्राम प्रधान ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया तथा तुरंत शौचालय निर्माण का कार्य शुरू करवा दिया। बताया कि अब शौचालय बनवाने के बाद ही बहू को लेने जाऊंगा। चकबीरा (शुकुलपुर) के प्रधान लालधर पाल का कहना है कि गांव में पचास फीसदी घरों में अभी भी शौचालय नहीं है। हमारे पास जो आता है उसकी हर संभव मदद की जाती है। सेक्रेटरी सर्वेश कुमार का कहना है कि गांव के जिन घरों में शौचालय नहीं है। उसका सर्वे कराकर सूची जिला समन्वयक को सौंप दी गई है।