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चार हजार छात्रों का डाटा संदिग्ध, लटकी प्रतिपूर्ति

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शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले चार हजार विद्यार्थियों का डाटा संदिग्ध हो गया है। इससे उनके शुल्क प्रतिपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रमाण पत्रों में सुधार कराने के लिए अभिभावक व विद्यार्थी डाकघर, सहज जन सेवा केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं।
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दशमोत्तर यानि 11वीं से लेकर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ देती है। पूर्व के वर्षों में नाम आदि में थोड़ा परिवर्तन होने पर भी लाभ दे दिया जाता था, लेकिन अब आधार, शैक्षिक और बैंक प्रमाणपत्र एक जैसे होंगे, तभी छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाएगा। जिले में 2021 सत्र में इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक संग अन्य तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर रहे 18 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की ओर से आवेदन किया गया। 14 हजार को शुल्क प्रतिपूर्ति औैर छात्रवृत्ति का लाभ मिल गया, लेकिन अब भी चार हजार के खाते में पैसा नहीं आया है। समाज कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के लोगों का कहना है कि अधिकतर छात्र-छात्राओं के प्रमाणपत्र में खामियां हैं, जबकि कुछ के कागजात सही नहीं होने से लाभ नहीं मिल सका है। करीब चार हजार छात्र-छात्राओं का डाटा संदिग्ध है। उसे सुधारने के लिए मौका दिया गया था। अगर त्रुटियां सही हो गई होंगी तो नया सत्र शुरू होने से पूर्व पैसा भेजा जाएगा। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी अजय सिंह ने कहा कि छात्र-छात्राओं को सुधार करने के लिए मौका दिया गया था। इसमें 500 विद्यार्थियों के प्रमाणपत्र सही होने पर शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए पत्र लिखा गया है। उन्होंने बताया कि करीब चार हजार विद्यार्थियों का डाटा संदिग्ध होने से शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं जा सकी।
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