ज्ञानपुर। जनपद में संचालित पशु अस्पतालों और आवासीय भवनों की हालत खराब हो जाने से कर्मचारियों की जान खतरे में पड़ती नजर आ रही है। समय रहते पशुपालन विभाग सक्रिय न हुआ तो आगामी दिनों में होने वाली झमाझम बारिश में किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
छह ब्लॉकों औराई, भदोही, अभोली, सुरियावां, ज्ञानपुर और डीघ अंतर्गत एक दशक पूर्व करोड़ों खर्च कर विभाग ने अस्पतालों का निर्माण तो करा दिया, लेकिन उचित ढंग से रखरखाव न होने के कारण लगभग एक दर्जन अस्पताल के छतों के टपकने, फर्श टूटने, बाउंड्रीवाल गिरने, आवासीय भवनों के दरवाजे क्षतिग्रस्त होने के साथ ही शौचालयों की दुर्दशा अत्यंत नाजुक स्थिति में पहुंच जाने से कर्मचारी हमेशा किसी न किसी अनहोनी को लेकर भयभीत रहते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और ही नाजुक हो जाने से रात्रि प्रवास कर पाना असंभव बना रहता है।
इतना ही नहीं सुविधा के लिए परिसर में दवा कक्ष, चिकित्सक कक्ष, स्टोर कक्ष यहां तक कि पशुओं के इलाज कराने आने वाले पशुपालकों के लिए भी छाजन आदि के निर्माण हुए हैं, लेकिन मरम्मत के अभाव में खड़ा तक हो पाना खतरे से खाली नहीं रहता। डीघ विकास खंड का जंगीगंज पशु अस्पताल अपने आप में अनदेखी के सभी मानकों का नजीर भी है। प्रभारी सीवीओ डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि कर्मचारियों की लापरवाही से समस्या खड़ी हो रही है। यदि कर्मचारी रात्रि प्रवास कर परिसर में भवनों के प्रति गंभीरता दिखाई होती तो सबकुछ ठीकठाक रहता। जिले में कुल 11 अस्पताल संचालित हैं, जिनके भवनों के जर्जर होने का मामला संज्ञान में आने पर मरम्मत के लिए 22 लाख का बजट निर्धारित कर शासन स्तर से मांगा जा चुका है। बजट मिलते ही दो-दो लाख रुपए से मरम्मत कार्य संभव हो जाएगा।