ज्ञानपुर/लालानगर। मंडुआडीह-इलाहाबाद रेल रूट पर स्थित ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर असुविधाओं का टोटा दो दशक बाद भी खत्म न होने से सुरक्षा दांव पर लगी है। क्षतिग्रस्त प्लेटफार्मों पर यात्रियों के पग डगमगाने से न जाने कब और कहां खतरा हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। अतिमहत्वपूर्ण सुविधाओं में शामिल शौचालय, पेयजल, स्वच्छता का अभाव आज भी लोगों को सता रहा है। इसका मुख्य कारण भी है कि मंडलीय प्रशासन की उपेक्षा न हो तो अब तक खर्च हो चुके करोड़ों का सही अर्थ भी सामने आ चुका होता।
ज्ञानपुर रोड स्टेशन एकमात्र ऐसा स्टेशन है कि वाराणसी मंडल को सबसे अधिक राजस्व देता है बावजूद इसके दुर्व्यवस्थाओं का दंश झेलना मजबूरी बन चुकी है। जीर्णोद्धार के बाद से अब तक मात्र तोड़फोड़ ही चारों ओर देखने को मिल रही है। सुविधाओं का लाभ यात्री प्रतिमाह लाखों रुपये देने के बाद भी नहीं पाते। वाराणसी, प्रयागराज, नईदिल्ली, मुंबई, पटना, बिहार, हावड़ा, गोरखपुर, कानपुर, सिकंदराबाद, उधना, दानापुर, अहमदाबाद सहित अन्य दूरदराज स्थानों की यात्रा करने वाली महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्टेशन के एक छोर से दूसरी छोर तक फैले प्लेटफार्म पर नजर दौड़ाई जाए तो वह दोहरीकरण की भेंट चढ़ चुके हैं। डेढ़ दशक का समय पूरा कर चुके शौचालय गंदगी से पटे हैं। पेयजल के लिए लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिए गए लेकिन एक भी संयंत्र स्टेशन पर सही सलामत नहीं मिल सकते। स्वच्छता के नाम पर प्रतिवर्ष 10 से 20 लाख रुपए बर्बाद होते हैं फिर भी स्टेशन का कोना-कोना गंदगी से पटा मिलेगा। यात्रियों को बैठने की सुविधा मात्र फर्श ही है। विद्युतीकरण के बाद पूर्वी छोर के यात्रियों को दूसरे प्लेटफार्म पर पहुंचना हमेशा से दुखदाई रहा है क्योंकि मात्र एक फुट ओवरब्रिज से यात्रियों को आर-पार कराया जाता है। स्टेशन के आस-पास और प्लेटफार्म पर उगे जंगली झुरमुट ही शौचालय भवन साबित हो रहे हैं। सुरक्षा के नाम पर एक भी पोस्ट स्टेशन पर नहीं बनाए जा सके हैं। स्टेशन अधीक्षक एके वर्मा का कहना है कि समस्याओं के बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।