सरकार एक तरफ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून गारंटी अधिनियम के तहत जरूरतमंदों को अनाज मुहैया कराना चाह रही है तो दूसरी तरफ जिले में प्रशासनिक लापरवाही के चलते करीब 60 हजार आबादी को राशन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। परिसीमन में आई नई ग्रामसभा की करीब 25 दूकानों को जहां चयन का इंतजार है वहीं 30 दूकानें निलंबित चल रही है। उन्हें करीबी दूकानों से संबद्ध किया गया है। कार्डधारकों को राशन और केरोसिन लेने दूर दराज जाना पड़ता है। पुरुष तो किसी तरह चले जाते हैं लेकिन जिन घरों में सिर्फ महिलाएं हैं उनको काफी दिक्कते होती हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सरकार कोटे की दूकानों के माध्यम से अनाज,केरोसिन और चीनी मुहैया कराती है। दो साल पूर्व राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून प्रभावी होने के बाद भी स्थिति बेहतर नहीं हो रही है। जिले के करीब 660 कोटे की दूकानों में 30 निलंबित चल रही हैं जबकि नई ग्राम पंचायतों की 25 कोटे की दूकानों का चयन नहीं हो सका है। ऐसे में 55 गांव करीब 60 हजार आबादी को राशन और केरोसिन के लिए प्रशासन और कोटेदारों का चक्कर काटना पड़ रहा है।
परिसीमन में 80 नई ग्रामसभाएं अस्तित्व में आई, इसमें 28 गांवों में पहले से दो दूकान होने से समायोजित हो गई। शेष 52 गांव में चयन प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन किसी तरह 27 गांव में ही नई दूकानें चयनित हो सकी, जबकि 25 दूकानों का प्रस्ताव और चयन अभी लटका है। इन गांव के पुराने कोटेदार ग्रामीणों को नई दूकान से राशन मिलने की बात कहकर टरका देते हैं।
निलंबित दूकानों को दूसरे दूकान से संबद्ध किया गया है। संबद्घ दूकानदार भी कार्डधारकों का हक मारने में पीछे नहीं रहते। ऐसे में करीब 60 हजार आबादी को हर माह राशन और केरोसिन के लिए भटकना पड़ता है। ऐसे गांवों में पुराने और संबद्घ कोटेदार उनको टरकाते रहते हैं। सुरियावां के पूरे मनोहर गांव निवासी राम प्रसाद शुक्ल ने कहा कि दूकान का आवंटन न होने से अनाज नहीं मिल रहा है। पुराने दूकानदार अनाज देने से मना करते हैं। सारीपुर गांव निवासी सीता देवी ने कहा कि दूकान पांच किमी दूर गांव में संबद्ध किया गया है, जिससे वह अनाज, केरोसिन नहीं ले पाती।