ज्ञानपुर। विस्फोटक का कारोबार के जरिए 12 लोगों की मौत की वजह बना कलियर मंसूरी बेटे आबिद के साथ मिलकर पटाखे बनाने का काम करता था। सामान्य पटाखे बनाने के लिए सामान की खरीद गौरीगंज से और सामान्य से अधिक साउंड वाले पटाखों के लिए सामान की खरीद सुल्तानपुर के पारसनाथ अग्रहरि से की जाती थी।
बुधवार को न्यायालय में पेशी पर जाते समय अमर उजाला के कुरेदने पर उसने स्वीकार किया कि पिछले दो वर्षों में तीन बार उसने सुल्तानपुर के शाहगंज निवासी पारसनाथ से पटाखा बनाने के सामान की खरीदारी की थी। बातचीत में पता चला कि सुल्तानपुर से बिना लाइसेंस के थोक में माल की सप्लाई करने वाले पारस के यहां से भदोही में अन्य स्थानों पर भी विस्फोटक और पटाखा बनाने के अन्य सामान मंगाए जाते हैं। उसने बताया कि वह छोटे बेटे आबिद के साथ मिलकर पटाखे का कारोबार करता था। इस काम में इरफान का भी सहयोग मिलता था, हालांकि वह मुख्य रूप से कालीन कारखाने का काम देखता था।
‘किसी ने धोखे से रख दिया था सामान’
कोर्ट जाते समय मुख्य आरोपी कलियर मंसूरी ने कहा कि कुछ दिनों पूर्व कुछ अनजान लोग झोले में कोई सामान लेकर आए और दुकान पर रखकर कहा कि लौटते समय लेता जाऊंगा। लेकिन, नहीं आए। हो सकता है, उसी में कुछ विस्फोटक सामान रहा हो। हालांकि कलियर की इस बात में कितनी सच्चाई है, यह जांच का विषय है।
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पुलिस ने दिखाई औपचारिक गिरफ्तारी
ज्ञानपुर। घटना के बाद से ही गिरफ्तार किए जा चुके मुख्य आरोपी कलियर को पुलिस ने गिरफ्तारी दिखाने की औपचारिकता मंगलवार को पूरी की और बुधवार को उसे जेल भेजा गया। अदालत की प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद कलियर और पारसनाथ को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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