ज्ञानपुर। दो से ढाई दशक पूर्व बने सार्वजनिक खड़ंजे पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। डीएम के निर्देश पर गठित टीम भी कब्जा नहीं हटा सकी। सत्ता के एक नेता के दबाव में अधिकारी मौके पर जाकर भी लौट आए।
सार्वजनिक स्थलों से अवैध कब्जा हटाने के लिए भले ही भाजपा सरकार में एंटी भूमाफिया टीम का गठन किया गया है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। बेला गांव निवासी शिवधारी उर्फ त्रिभुवन ने 10 और 15 दिसंबर 2017, 20 जनवरी 2018, एक सितंबर 2018 को मंडलायुक्त और डीएम को प्रार्थना पत्र दिया। इसमें आरोप लगाया कि दो से तीन दशक पूर्व गांव में बिछाए गए खड़ंजे पर गांव के कुछ लोगों ने मिट्टी डालकर कब्जा कर लिया है। डीएम के निर्देश पर भदोही तहसील से कब्जाधारकों को नोटिस भेजा गया पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद एसडीएम भदोही यमुनाधर चौहान ने नायब तहसीलदार स्वामीनाथ सिंह, राजस्व निरीक्षक हरिशंकर पांडेय, लेखपाल सिद्धनाथ और वीरेंद्र कुमार पटेल के नेतृत्व में टीम गठित की। 18 सितंबर को उक्त टीम कब्जा हटाने के लिए बेला गांव पहुंची, लेकिन सत्तारूढ दल के नेता के चलते अधिकारी भी बिना कार्रवाई किए लौट आए। तब शिकायतकर्ता एक बार फिर डीएम से मिला। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। जांच के बाद कब्जा हटवाया जाएगा।