2009 के चुनाव में जिले में धारा 144 के उल्लंघन मामले में फंसे लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव, कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव और विधायक जाहिद बेग समेत 20 नेताओं को गैर जमानती वारंट के मामले में राहत मिल गई। वारंट जारी होने के बाद भदोही से लेकर लखनऊ तक की सियासत गरमा गई थी। ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी सत्य प्रकाश श्रीवास्तव के प्रयास से जिला जज ने मुख्य दंडाधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी।
2009 के चुनाव के दौरान जनपद में प्रचार के लिए आए प्रदेश के वर्तमान कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने भदोही नगर के अजीमुल्लाह चौराहे और सुरियावां नगर में धारा 144 प्रभावी होने के बाद भी बिना अनुमति के दो सभाएं कीं और बाद में पैदल मार्च भी किया था। मामले में भदोही कोतवाली और सुरियावां थाने में शिवपाल सिंह यादव, पारसनाथ यादव, ओम प्रकाश सिंह, राज्य मंत्री कैलाश चौरसिया, विधायक जाहिद बेग, रीबू श्रीवास्तव, ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा, एमएलसी रामलली मिश्रा, पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी, सांसद मनोज तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप यादव सहित करीब 22 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। विधायक विजय मिश्र समेत दो लोगों ने इस मामले में पहले ही जमानत ले ली थी।
10 दिन पूर्व मामले में मुख्य दंडाधिकारी सत्यवान सिंह की अदालत ने 20 नेताओं के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर उन्हें तलब किया था।
प्रकरण संज्ञान आते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आया और जिला जज कमल किशोर शर्मा के यहां ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। इस पर जिला जज ने गैर जमानती वारंट और तलबी आदेश पर रोक लगा दी। मंगलवार को मामले को लेकर जिलाध्यक्ष आरिफ सिद्दीकी और वंशीधर गुप्ता अभियोजन अधिकारी के साथ-साथ न्यायालय का चक्कर लगाते रहे।