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Bhadohi News: विकास की टंकी से टपकता भ्रष्टाचार

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चौरी के माधोरामपुर में पेयजल टंकी गिरा पानी। संवाद
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चौरी। भदोही ब्लॉक के माधोरामपुर गांव में जल जीवन मिशन के हर घर नल से जल योजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। यहां नवनिर्मित पानी की टंकी टेस्टिंग में ही फेल हो गई। रविवार की शाम को पानी भरने के बाद टंकी कई जगह से टपकने लगी। रातभर में टंकी से हजारों लीटर पानी टपककर बर्बाद हो गया। इससे टंकी निर्माण के गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए साल 2022 से जिले में तीन चरणों में करीब 400 परियोजनाएं जल जीवन मिशन योजना से स्वीकृत हुईं। इसमें करीब 150 परियोजनाओं से पानी आपूर्ति शुरू कर दी गई है। 250 टंकियां अभी निर्माणाधीन हैं। जैसे-जैसे काम पूरा हो रहा है, वैसे-वैसे गांव में पानी की आपूर्ति की जा रही है। माधोरामपुर में आपूर्ति के लिए दो लाख लीटर स्टोर करने की क्षमता वाली टंकी का निर्माण पांच महीने पहले कराया गया। इस टंकी का निर्माण जी इंफ्रा ने कराया है। पाइप बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। रविवार की शाम को टंकी में पहली बार पानी भरा गया, लीकेज के कारण सुबह होते-होते टंकी खाली हो गई। सोमवार की सुबह जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो क्षेत्र पंचायत सदस्य जयप्रकाश सोनकर के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर जांच की मांग की।
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एक परियोजना पर लगभग तीन करोड़ खर्च
जिले में जल जीवन मिशन की एक परियोजना पर लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इस धनराशि से पेयजल टंकी निर्माण, पाइपलाइन, घर-घर टोटी लगाने का काम होना है। एक टंकी के निर्माण में लगभग 50 से 65 लाख की धनराशि खर्च हो रही है। अभी तक गिने-चुने गांव में पानी की आपूर्ति हो रही है। दूसरी टंकियों का निर्माण भी यदि इसी तरह हुआ होगा तो सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का बंटाधार होना तय है।
योजना के मुख्य बिंदु
- तीन चरणों में साल 2022 से 2024 तक 400 परियोजनाएं स्वीकृत हुईं योजना के तहत
- अब तक लगभग 200 परियोजनाओं से पंप से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है।

- बजट की कमी से कई परियोजनाओं को काम लगभग एक साल से रुका हुआ है।
- पहले योजना पूरी होने की अवधि 2025 थी, अब साल 2028 कर दी गई है।



पानी की टंकी में लीकेज नहीं हो सकता है। वॉल लीकेज हो सकता है। मैं स्वयं जाकर टंकी का निरीक्षण करूंगा। ताकि पानी लीकेज होने का कारण पता चल सके। यदि कार्यदायी संस्था की लापरवाही मिली तो शासन को पत्र भेजा जाएगा। - विनय यादव, जेई, जल निगम।
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