गोपीगंज (भदोही)। माह-ए-रमजान में सावधानी न बरतने वाला कोरोना वायरस का शिकार हो सकता है। ऐसा हुआ तो वह दूसरों की परेशानी भी बढ़ाएगा। उक्त बातें बुधवार को जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज अनीसुल कादरी ने अवाम से कही।
उन्होंने कहा कि देशव्यापी कोरोना महामारी को रोकने के लिए लॉकडाउन का एक हिस्सा सही सलामत बीता, लेकिन उससे कहीं खतरनाक दूसरे चरण को वायरस से प्रभावित होने से बचाना हम सभी की जिम्मेदारी बनती है। मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में रोजेदार रोजा रखकर लॉकडाउन का भी पालन करते रहेंगे, जिससे शासन-प्रशासन के निर्देशों का पालन हो सके और कौम की सुरक्षा में सेंध न लग पाए। कहा कि रोजेदार फर्ज और तरावीह की नमाज घरों में सोशल डिस्टेंस में रहकर पढ़ें। इस दौरान स्वच्छता के साथ-साथ मास्क लगाने में भी लापरवाही न बरतें।
उन्होंने कहा कि नबी सल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया है कि कयामत से करीब जमाने में बलाएं आसमान से उतरेंगे। ऐसे वक्त में सोने वाला जागने वाले से बेहतर होगा, बैठने वाला खड़ा होने वाले से बेहतर होगा। खड़ा होने वाला चलने वाले से बेहतर होगा। एहतियात को अमल में न लाने वाला ही इस अजाब का भुक्तभोगी बनेगा। रमजान शरीफ की खुशियां घर में रहकर मनाएं और इबादत करें तभी इस मुश्किल घड़ी से निजात मिलेगी।