हर आदमी का सपना होता है कि उसका अपना घर हो। महंगाई के इस दौर में गिने चुने लोग ही अपने सपनों को साकार कर पाते हैं। इसका प्रमुख कारण महंगाई है। पिछले एक वर्ष में मजदूरी बढ़ी है, जबकि निर्माण सामग्री की कीमतों में हमेशा उतार चढ़ाव देखने को मिला। मकान का ढांचा खड़ा करने के बाद फिनिशिंग पर भारी भरकम धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। इससे आम आदमी का बजट गड़बड़ा गया है। कुल मिलाकर भवन निर्माण में एक वर्ष में 20 प्रतिशत तक महंगाई बढ़ी है।
भवन निर्माण सामग्रियों में सरिया, सीमेंट, बालू, गिट्टी मुख्य जरूरत पड़ती है। देखा जाए तो कुछ सामग्री के दाम जहां एक वर्ष से स्थिर हैं तो सीमेंट और सरिया की कीमतें आंशिक रूप से बढ़ी हैं। 70 घन फीट ट्रैक्टर बालू फिलहाल छह हजार रुपये में मिल रहा है। इसकी कीमत कमोवेश एक वर्ष पूर्व भी इसके आसपास थी। इतना जरूर है कि लेबर और मिस्त्री के खर्चों में 20 प्रतिशत तक इजाफा हो गया है। वर्तमान में लेबर को प्रतिदिन 350 रुपये और एक मिस्त्री दक्षता के हिसाब से 500 रुपये से 600 रुपये तक लेता है। सिविल इंजीनियर डीके तिवारी का कहना है कि आज 800 रुपये प्रति वर्ग फीट में मकान का ढांचा तैयार हो जा रहा है। लेकिन इसमें बिजली, पानी की व्यवस्था के साथ रंगाई पुताई कराने में काफी धनराशि खर्च हो जा रही है। यही वह क्षेत्र है जिसमें एक साल में 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। ईंट 7 हजार रुपये प्रति हजार है। ईंट के कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से शीघ्र ही इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं। बिजली उपकरण, पेंटिंग आदि की कीमतें भी 20 प्रतिशत तक बढ़ने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।